रायपुर, 15 सितंबर 2026। शिक्षक दिवस के अवसर पर शिक्षक रत्न सम्मान समारोह 2026 का आयोजन रोटरी क्लब, राजेंद्र नगर, रायपुर में हर्षोल्लास के साथ किया गया। एस.एस. क्रिएशन इवेंट कंपनी रायपुर, बिट बाइट इन्फोटेक एवं अज़ीम एजुकेशन एंड वेलफेयर सोसाइटी (AEWS) के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस समारोह में छत्तीसगढ़ के विभिन्न अंचलों से पहुंचे करीब 100 शिक्षकों-शिक्षिकाओं को प्रशस्ति पत्र एवं प्रतीक चिन्ह देकर सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में शिक्षा के क्षेत्र में शिक्षकों के योगदान, बदलते दौर में उनकी भूमिका तथा समाज निर्माण में उनके महत्व पर वक्ताओं ने अपने विचार रखे।
शिक्षक का सम्मान पूरे छत्तीसगढ़ का सम्मान : ममता साहू
समारोह की मुख्य अतिथि छत्तीसगढ़ राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष ममता साहू ने शिक्षकों को संबोधित करते हुए कहा कि शिक्षक दिवस केवल एक दिन मनाया जाने वाला अवसर नहीं, बल्कि एक संस्कार है। उन्होंने कहा कि डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन ने कहा था कि देश का भविष्य कक्षाओं में बनता है। उन्होंने कहा कि एक मंच पर करीब 100 शिक्षकों का सम्मान देखकर मन प्रसन्न है। विशेष रूप से महिला शिक्षिकाओं का योगदान अतुलनीय है। शिक्षक समाज की रीढ़ हैं और शिक्षकों का सम्मान वास्तव में पूरे छत्तीसगढ़ का सम्मान है।
शिक्षक ज्ञान के साथ संस्कार भी देता है
IGKV रायपुर के डॉ. दीपक शर्मा ने कहा कि शिक्षक अन्नदाता की तरह ज्ञानदाता होता है। कृषि विश्वविद्यालय में भी यह देखने को मिलता है कि एक अच्छा शिक्षक ही बेहतर वैज्ञानिक तैयार करता है। वरिष्ठ शोधार्थी रघुनाथ भारद्वाज ने भारतीय संस्कृति में गुरु के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि भारतीय परंपरा में गुरु को अत्यंत ऊंचा स्थान दिया गया है। उन्होंने कहा कि आज के शिक्षकों में भी ऋषि परंपरा की झलक दिखाई देती है। वहीं NIT रायपुर के डॉ. विपुल चौधरी ने कहा कि तकनीक के इस दौर में शिक्षक की भूमिका और अधिक महत्वपूर्ण हो गई है। AI के दौर में भी संस्कार और मानवीय मूल्य केवल शिक्षक ही दे सकता है। उन्होंने शिक्षक रत्न सम्मान समारोह के आयोजन को सराहनीय पहल बताया।
शिक्षकों का सम्मान सबसे बड़ा पुरस्कार : डॉ. कविता कुम्भज
डॉ. कविता कुम्भज ने कहा कि एक शिक्षिका के रूप में वह महसूस करती हैं कि शिक्षक का सम्मान उनके लिए सबसे बड़ा पुरस्कार है। उन्होंने कहा कि मंच पर सम्मानित हो रहे करीब 100 शिक्षकों की आंखों में दिखाई दे रही खुशी और चमक ही असली भारत की तस्वीर है।
डॉ. प्रीति उपाध्याय ने कहा कि शिक्षक केवल पाठ्यक्रम नहीं पढ़ाता, बल्कि जीवन जीने की सीख भी देता है। इस तरह के आयोजन नई पीढ़ी को शिक्षा और शिक्षकों के प्रति सम्मान की भावना से जोड़ने का काम करते हैं।
श्री मनोज वैष्णव ने कहा कि रायपुर से लेकर बस्तर तक के शिक्षकों को एक मंच पर लाना अपने आप में बड़ी उपलब्धि है।
वहीं डॉ. रितु श्रीवास्तव ने शिक्षा को समाज में बदलाव का माध्यम बताते हुए कहा कि शिक्षा वह दीपक है, जो अंधकार मिटाने का काम करती है और शिक्षक उस दीपक की लौ को आगे बढ़ाता है।
आयोजन समिति की रही महत्वपूर्ण भूमिका
शिक्षक रत्न सम्मान समारोह के आयोजन में समिति के सदस्यों की महत्वपूर्ण भूमिका रही। पीयूष जैन, समाजसेवी एवं मुख्य संयोजक, शिक्षा और समाज कल्याण के क्षेत्र में लंबे समय से सक्रिय हैं। उन्होंने छत्तीसगढ़ के कर्मठ शिक्षकों को सम्मान और पहचान देने के उद्देश्य से इस आयोजन की पहल की। प्रिया गुप्ता, डायरेक्टर, बिट बाइट इन्फोटेक ने शिक्षा को डिजिटल तकनीक से जोड़ने की दिशा में अपने विचार साझा किए और आयोजन को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। शगुफ्ता अफरोज, डायरेक्टर, अज़ीम एजुकेशन एंड वेलफेयर सोसाइटी (AEWS), शिक्षा के माध्यम से वंचित वर्ग तक ज्ञान पहुंचाने के उद्देश्य से कार्य कर रही हैं। वहीं सार्थक जैन, डायरेक्टर, एस.एस. क्रिएशन इवेंट कंपनी रायपुर ने कार्यक्रम के इवेंट प्रबंधन और सफल संचालन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। युवा उद्यमी के रूप में वे छत्तीसगढ़ में इवेंट इंडस्ट्री को नई दिशा देने की दिशा में कार्य कर रहे हैं।
सम्मान पाकर शिक्षकों ने जताया आभार
समारोह में सम्मानित करीब 100 शिक्षकों ने प्रशस्ति पत्र एवं प्रतीक चिन्ह प्राप्त कर आयोजकों के प्रति आभार व्यक्त किया। शिक्षकों ने कहा कि इस तरह का सम्मान उनके कार्य के प्रति नई ऊर्जा और जिम्मेदारी का भाव पैदा करता है। आयोजकों ने कहा कि शिक्षक समाज निर्माण की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी हैं। उनका सम्मान केवल व्यक्तिगत सम्मान नहीं, बल्कि शिक्षा, संस्कार और बेहतर समाज निर्माण के प्रति सम्मान है। शिक्षक रत्न सम्मान समारोह 2026 ने इसी संदेश को मजबूती के साथ सामने रखा।
