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बारिश में बढ़ रहा न्यूरोलॉजिकल बीमारियों का खतरा, बुखार और दौरे को न करें नजरअंदाज

विशेषज्ञों ने दी चेतावनी, समय पर इलाज न मिलने पर हो सकती है गंभीर जटिलताएं

by Bholuchand News

रायपुर। बारिश का मौसम जहां लोगों को भीषण गर्मी से राहत देता है, वहीं यह कई संक्रामक और गंभीर बीमारियों के खतरे को भी बढ़ा देता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि मानसून के दौरान वायरल और मच्छरजनित संक्रमण तेजी से फैलते हैं, जिससे मस्तिष्क और तंत्रिका तंत्र को प्रभावित करने वाली कई गंभीर बीमारियों के मामले भी बढ़ सकते हैं।

आईएलएस अस्पताल रायपुर के न्यूरोलॉजिस्ट डॉ. भुवन शर्मा के अनुसार, बरसात के मौसम में एन्सेफलाइटिस (मस्तिष्क की सूजन), मेनिन्जाइटिस, गिलियन-बैरे सिंड्रोम (GBS), तीव्र दौरे (सीजर्स) और कुछ मामलों में स्ट्रोक जैसी समस्याओं का खतरा बढ़ जाता है। समय पर पहचान और उपचार नहीं मिलने पर ये बीमारियां जानलेवा भी साबित हो सकती हैं।

डॉ. शर्मा ने बताया कि एन्सेफलाइटिस और मेनिन्जाइटिस जैसी बीमारियों में मरीज को तेज बुखार, भ्रम की स्थिति, अत्यधिक नींद, व्यवहार में बदलाव, लगातार उल्टी, दौरे पड़ना और बेहोशी जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं। वहीं गिलियन-बैरे सिंड्रोम में वायरल संक्रमण के बाद पैरों से शुरू होने वाली कमजोरी धीरे-धीरे पूरे शरीर में फैल सकती है। गंभीर स्थिति में मरीज को सांस लेने में भी परेशानी हो सकती है।

विशेषज्ञों के अनुसार बारिश के दौरान डेंगू, चिकनगुनिया और जापानी एन्सेफलाइटिस जैसे मच्छरजनित रोग भी तंत्रिका तंत्र को प्रभावित कर सकते हैं। कुछ मरीजों में इन संक्रमणों के कारण दौरे, बेहोशी, लकवा या अन्य न्यूरोलॉजिकल जटिलताएं विकसित हो सकती हैं।
डॉ. शर्मा का कहना है कि यदि किसी व्यक्ति को बुखार के साथ दौरे पड़ें, अचानक भ्रम की स्थिति उत्पन्न हो, शरीर के किसी हिस्से में कमजोरी महसूस हो, बोलने या समझने में परेशानी हो या चेतना का स्तर कम होने लगे, तो इसे सामान्य वायरल संक्रमण मानकर अनदेखा नहीं करना चाहिए। ऐसी स्थिति में तुरंत विशेषज्ञ चिकित्सक से संपर्क करना जरूरी है।

उन्होंने बताया कि न्यूरोलॉजिकल इमरजेंसी में समय सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। सही समय पर जांच और उपचार मिलने से न केवल मरीज की जान बचाई जा सकती है, बल्कि स्थायी विकलांगता और अन्य गंभीर जटिलताओं के जोखिम को भी काफी हद तक कम किया जा सकता है।
इन लक्षणों को बिल्कुल नजरअंदाज न करें:
• बुखार के साथ दौरे पड़ना
• अचानक भ्रम या बेहोशी आना
• व्यवहार या व्यक्तित्व में बदलाव
• शरीर के किसी हिस्से में कमजोरी या लकवा
• बोलने या समझने में कठिनाई
• लगातार उल्टी होना
• अत्यधिक नींद या चेतना में कमी
• चलने में असंतुलन या अचानक कमजोरी
स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने लोगों से मानसून के दौरान साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखने, मच्छरों से बचाव के उपाय अपनाने और किसी भी गंभीर लक्षण के दिखाई देने पर तुरंत चिकित्सकीय परामर्श लेने की अपील की है।

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