रायपुर। छत्तीसगढ़ संस्कृति विभाग द्वारा आयोजित कला प्रशिक्षण शिविर ‘आकार-2026’ इस वर्ष केवल पारंपरिक और लोक कलाओं तक सीमित नहीं रहा, बल्कि नवाचार, पर्यावरण संरक्षण और रचनात्मक सोच का भी प्रेरक मंच बनकर सामने आया। शिविर में आयोजित बोनसाई कला प्रशिक्षण ने प्रतिभागियों को ऐसी अनूठी तकनीक से परिचित कराया, जिसमें सामान्यतः अनुपयोगी समझे जाने वाले सिपोरेक्स ब्लॉक्स और थर्माकोल के टुकड़ों को आकर्षक कलाकृतियों में बदल दिया गया।
प्रशिक्षण शिविर के दौरान प्रतिभागियों ने सिपोरेक्स और थर्माकोल जैसी सामग्री का उपयोग कर कलात्मक गमले, प्राकृतिक लैंडस्केप, कृत्रिम पहाड़, चट्टानें और सजावटी संरचनाएं तैयार करना सीखा। इस अभिनव प्रयोग ने कला और पर्यावरण संरक्षण के बीच एक सुंदर संतुलन प्रस्तुत किया। इससे प्रतिभागियों को यह समझने का अवसर मिला कि रचनात्मक सोच के माध्यम से बेकार समझी जाने वाली वस्तुओं को भी उपयोगी और आकर्षक बनाया जा सकता है।
इस विशेष प्रशिक्षण का संचालन प्रसिद्ध बोनसाई विशेषज्ञ डॉ. मनोज अग्रवाल द्वारा किया गया। उन्होंने प्रतिभागियों को सामग्री चयन, डिजाइन निर्माण, आकार निर्धारण, रंग संयोजन और बोनसाई प्रदर्शन के लिए उपयुक्त लैंडस्केप तैयार करने की तकनीकों की विस्तृत जानकारी दी। प्रशिक्षण के दौरान उन्होंने बताया कि कला केवल सौंदर्य का माध्यम नहीं, बल्कि पर्यावरण संरक्षण और पुनर्चक्रण के प्रति जागरूकता बढ़ाने का प्रभावी साधन भी है।
शिविर में लगभग 80 प्रशिक्षार्थियों ने भाग लिया। युवा कलाकारों से लेकर वरिष्ठ कला प्रेमियों तक सभी ने उत्साहपूर्वक इस कला को सीखा और अपनी रचनात्मकता का प्रदर्शन किया। प्रशिक्षण के अंतिम चरण में तैयार की गई कलाकृतियों ने उपस्थित दर्शकों और कला प्रेमियों का विशेष ध्यान आकर्षित किया।

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प्रतिभागियों का कहना था कि यह कला कम लागत में घरों, बगीचों और सार्वजनिक स्थलों को आकर्षक बनाने का अवसर प्रदान करती है। साथ ही भविष्य में यह स्वरोजगार और रचनात्मक उद्यमिता के नए अवसर भी उपलब्ध करा सकती है। कई प्रशिक्षार्थियों ने आगामी शिविरों में इस विधा का उन्नत प्रशिक्षण प्राप्त करने की इच्छा भी व्यक्त की।
गौरतलब है कि संस्कृति विभाग द्वारा 25 मई से 9 जून 2026 तक आयोजित ‘आकार-2026’ शिविर में चित्रकला, मूर्तिकला, लोक एवं जनजातीय कलाओं सहित विभिन्न विधाओं का प्रशिक्षण दिया गया। शिविर का समापन रंगारंग कार्यक्रम और कला प्रदर्शनी के साथ हुआ, जिसमें प्रतिभागियों की उत्कृष्ट कृतियों को प्रदर्शित किया गया।
विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे नवाचार कला के क्षेत्र में नए आयाम स्थापित करने के साथ-साथ युवाओं में पर्यावरणीय चेतना और रचनात्मक सोच को भी प्रोत्साहित करते हैं। ‘आकार-2026’ का यह प्रयोग इस बात का उदाहरण है कि कल्पनाशीलता और कौशल के माध्यम से साधारण वस्तुओं को भी कला की अद्भुत कृतियों में बदला जा सकता है।

