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बस्तर आम महोत्सव 2026 : वैश्विक पहचान की ओर बढ़ता बस्तर का अनूठा स्वाद

मैंगो महोत्सव 2.0 को राष्ट्रीय स्तर पर स्थापित करने की तैयारी, विजेता किसानों एवं प्रसंस्कृत उत्पाद प्रदर्शकों का हुआ सम्मान

by Bholuchand News

जगदलपुर/रायपुर, 15 जून 2026
बस्तर अंचल की समृद्ध जैव-विविधता, प्राकृतिक कृषि परंपरा और उत्कृष्ट बागवानी क्षमता को नई पहचान दिलाने के उद्देश्य से जगदलपुर स्थित क्रांतिकारी डेबरीधुर उद्यानिकी महाविद्यालय एवं अनुसंधान केंद्र परिसर में आयोजित दो दिवसीय ‘बस्तर आम महोत्सव 2026’ का सफल समापन हुआ। महोत्सव ने बस्तर के पारंपरिक एवं दुर्लभ आमों की विविधता को राष्ट्रीय स्तर पर प्रदर्शित करने के साथ-साथ किसानों, युवाओं, उद्यमियों और कृषि विशेषज्ञों को एक साझा मंच प्रदान किया।

Bastar aam mahotsav

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महोत्सव में बस्तर क्षेत्र में उत्पादित देशी और हाइब्रिड आमों की अनेक प्रजातियों का प्रदर्शन किया गया। साथ ही आम से तैयार विभिन्न मूल्य संवर्धित उत्पादों जैसे अचार, अमचूर, पना, मैंगो पल्प, जैम एवं अन्य प्रसंस्कृत उत्पादों ने आगंतुकों का विशेष ध्यान आकर्षित किया।
ग्रामीण अर्थव्यवस्था और स्वरोजगार को मिलेगा बढ़ावा
समापन समारोह में कलेक्टर श्री आकाश छिकारा ने प्रदर्शनी का अवलोकन कर किसानों एवं प्रदर्शकों की सराहना की। उन्होंने कहा कि आम आधारित प्रसंस्करण उद्योग ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने और स्थानीय युवाओं के लिए स्वरोजगार के नए अवसर सृजित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

उन्होंने उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले किसानों एवं स्टॉल प्रदर्शकों को प्रशस्ति पत्र एवं पुरस्कार प्रदान कर सम्मानित किया।
राष्ट्रीय पहचान की ओर बढ़ रहा है बस्तर आम महोत्सव
कलेक्टर श्री छिकारा ने कहा कि बस्तर की प्राकृतिक जलवायु, जैविक खेती की परंपरा और कृषि संपदा आम उत्पादन के क्षेत्र में अपार संभावनाएं रखती है। पहले संस्करण की सफलता के बाद अब ‘मैंगो महोत्सव 2.0’ को और अधिक व्यापक स्वरूप देकर राष्ट्रीय स्तर के आयोजन के रूप में विकसित करने की दिशा में कार्य किया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि राज्य सरकार और प्रशासन का प्रयास है कि बस्तर को देश के प्रमुख आम उत्पादक क्षेत्रों में स्थापित किया जाए तथा यहां के उत्पादों को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंचाया जाए।

जैविक खेती ही भविष्य की राह
कलेक्टर ने प्राकृतिक एवं जैविक खेती के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि कृषि में रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों के अत्यधिक उपयोग से पर्यावरण और मानव स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। ऐसे में बस्तर जैसे क्षेत्रों में जैविक खेती को बढ़ावा देना समय की आवश्यकता है।

उन्होंने किसानों को आधुनिक कृषि तकनीकों, जैव-कीटनाशकों तथा टिकाऊ कृषि प्रणालियों को अपनाने की सलाह दी, जिससे उत्पादन बढ़ाने के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण भी सुनिश्चित किया जा सके।
एफपीओ को मजबूत बनाने पर विशेष जोर
स्थानीय किसानों की आय बढ़ाने और कृषि उत्पादों को बड़े बाजारों तक पहुंचाने के लिए कलेक्टर ने किसान उत्पादक संगठनों (FPO) को मजबूत बनाने पर विशेष बल दिया।

उन्होंने कहा कि संगठित उत्पादन, जैविक प्रमाणन, प्रभावी ब्रांडिंग और आधुनिक विपणन रणनीतियों के माध्यम से बस्तर के आमों को देश और दुनिया के उपभोक्ताओं तक पहुंचाया जा सकता है। इसके अलावा फसल विविधीकरण, बागवानी एवं पशुपालन आधारित एकीकृत कृषि प्रणाली किसानों के लिए अधिक लाभकारी सिद्ध हो सकती है।

किसानों को मिली नई दिशा
दो दिवसीय बस्तर आम महोत्सव 2026 न केवल कृषि, उद्यानिकी और खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र की संभावनाओं को सामने लाने में सफल रहा, बल्कि इस आयोजन ने किसानों को मूल्य संवर्धन, ब्रांडिंग, पैकेजिंग और बाजार विस्तार की नई दिशा भी प्रदान की।
कार्यक्रम में उद्यानिकी महाविद्यालय के अधिष्ठाता डॉ. गणेश नाग, जनप्रतिनिधि, कृषि वैज्ञानिक, उद्यानिकी विशेषज्ञ, बड़ी संख्या में किसान एवं विद्यार्थी उपस्थित रहे।

बस्तर आम महोत्सव ने यह साबित कर दिया है कि यदि स्थानीय उत्पादों को उचित मंच, ब्रांडिंग और बाजार उपलब्ध कराया जाए तो वे राष्ट्रीय और वैश्विक पहचान हासिल कर सकते हैं। आने वाले वर्षों में यह आयोजन बस्तर की कृषि अर्थव्यवस्था और किसानों की आय बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

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