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पारस इंस्टीट्यूट ऑफ एजुकेशन में बच्चों के लिए विशेष कार्यशाला, हस्त मुद्रा, ध्यान और लक्ष्य निर्धारण की दी जानकारी

वास्तु मित्र शिव नारायण मूंधड़ा ने बच्चों को कराया हस्त मुद्रा एवं ध्यान का अभ्यास, सकारात्मक सोच और जीवन में लक्ष्य तय करने के लिए किया प्रेरित

by bholuchand news
रायपुर। पारस इंस्टीट्यूट ऑफ एजुकेशन में बच्चों के ज्ञान, आत्मविश्वास, सकारात्मक सोच और व्यक्तित्व विकास को ध्यान में रखते हुए एक विशेष एवं ज्ञानवर्धक कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला में बच्चों को हस्त मुद्रा, ध्यान, वास्तु तथा जीवन में लक्ष्य निर्धारण जैसे महत्वपूर्ण विषयों के बारे में सरल और रोचक तरीके से जानकारी दी गई। कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य बच्चों को पढ़ाई के साथ-साथ अपने मन, विचारों और जीवन के लक्ष्य को समझने के लिए प्रेरित करना रहा। कार्यक्रम के दौरान बच्चों ने पूरे उत्साह के साथ विभिन्न गतिविधियों में हिस्सा लिया और नई विधियों को सीखने के साथ उनका अभ्यास भी किया।

हस्त मुद्रा और ध्यान की विधियों से कराया परिचित

कार्यशाला में शिव नारायण मूंधड़ा, जिन्हें “वास्तु मित्र” के नाम से भी जाना जाता है, ने बच्चों को हस्त मुद्रा और ध्यान से जुड़ी विभिन्न विधियों की जानकारी दी। उन्होंने बच्चों को सरल तरीके से समझाया कि नियमित अभ्यास, एकाग्रता और सकारात्मक सोच को जीवन का हिस्सा बनाने से व्यक्ति अपने दैनिक जीवन में बेहतर अनुशासन विकसित कर सकता है। इस दौरान बच्चों को विभिन्न हस्त मुद्राओं का अभ्यास कराया गया। बच्चों ने भी काफी रुचि के साथ इन गतिविधियों में भाग लिया। ध्यान के माध्यम से मन को शांत रखने और एकाग्रता बढ़ाने से जुड़े पहलुओं पर भी चर्चा की गई।

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विभिन्न विधाओं के माध्यम से जागरूकता का प्रयास

शिव नारायण मूंधड़ा लंबे समय से वास्तु, ध्यान, ज्योतिष, सुजोक एक्यूप्रेशर, कलर थेरेपी, श्वास विज्ञान और मुद्रा विज्ञान जैसी विभिन्न विधाओं के माध्यम से लोगों को जागरूक करते रहे हैं। कार्यशाला में उनके द्वारा विकसित “स्वयंप्रभा” ध्यान विधि के बारे में भी जानकारी दी गई। बच्चों को ध्यान और आत्म-अनुशासन से जुड़े विषयों को समझाते हुए अपनी दिनचर्या में सकारात्मक आदतों को शामिल करने के लिए प्रोत्साहित किया गया।

“कैसा हो अपना जीवन लक्ष्य” विषय पर हुई चर्चा

कार्यशाला का एक महत्वपूर्ण हिस्सा “कैसा हो अपना जीवन लक्ष्य – लक्ष्य कैसे निर्धारित करें?” विषय पर केंद्रित रहा। इस दौरान बच्चों को समझाया गया कि जीवन में आगे बढ़ने के लिए लक्ष्य निर्धारित करना और उसके लिए लगातार प्रयास करना जरूरी है। बच्चों को यह संदेश दिया गया कि बड़ा लक्ष्य तय करने के साथ उसे छोटे-छोटे चरणों में बांटकर आगे बढ़ना चाहिए। सफलता के लिए नियमित मेहनत, अनुशासन और अपने प्रयासों में निरंतरता बनाए रखना महत्वपूर्ण है।

कार्यशाला में बच्चों को प्रेरित करते हुए कहा गया कि—

  • नई विधाएं सीखें और अपने ज्ञान का विस्तार करें।
  • अपने मन और विचारों को समझने का प्रयास करें।
  • अपने जीवन के लक्ष्य निर्धारित करें।
  • लक्ष्य प्राप्त करने के लिए निरंतर प्रयास करें।
  • सकारात्मक सोच और अच्छी आदतों को अपने जीवन का हिस्सा बनाएं।

शिक्षा के साथ व्यक्तित्व विकास पर भी जोर

पारस इंस्टीट्यूट ऑफ एजुकेशन का उद्देश्य केवल बच्चों को शैक्षणिक शिक्षा प्रदान करना ही नहीं, बल्कि उनके समग्र व्यक्तित्व विकास पर भी ध्यान देना है। संस्था की ओर से बच्चों के ज्ञान के साथ उनके आत्मविश्वास, सकारात्मक सोच, अनुशासन और सामाजिक समझ को मजबूत करने की दिशा में भी गतिविधियां आयोजित की जाती हैं। संस्था का मानना है कि बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए किताबों की शिक्षा के साथ उन्हें अपने विचारों को समझने, लक्ष्य निर्धारित करने और जीवन में सकारात्मक दृष्टिकोण अपनाने के अवसर भी मिलना चाहिए।

बच्चों ने उत्साहपूर्वक लिया हिस्सा

कार्यशाला के दौरान बच्चों में खासा उत्साह देखने को मिला। उन्होंने हस्त मुद्रा एवं ध्यान की विधियों को सीखने के साथ-साथ लक्ष्य निर्धारण से जुड़े विषयों पर भी अपनी रुचि दिखाई। कार्यशाला ने बच्चों को यह समझने का अवसर दिया कि शिक्षा केवल पुस्तकों तक सीमित नहीं है, बल्कि स्वयं को समझना, नई चीजें सीखना, सकारात्मक सोच विकसित करना और अपने भविष्य के लिए लक्ष्य तय करना भी सीखने की प्रक्रिया का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

शिव नारायण मूंधड़ा का किया आभार व्यक्त

कार्यशाला के सफल आयोजन के लिए पारस इंस्टीट्यूट ऑफ एजुकेशन की ओर से  शिव नारायण मूंधड़ा के प्रति आभार व्यक्त किया गया। संस्था ने कहा कि उन्होंने अपने ज्ञान और अनुभव को बच्चों के साथ साझा कर उन्हें नई विधाओं से परिचित कराया और जीवन में लक्ष्य निर्धारित करने के लिए प्रेरित किया। कार्यशाला का संदेश रहा कि सीखने की कोई उम्र नहीं होती और सही दिशा, निरंतर प्रयास तथा सकारात्मक सोच के साथ बच्चे अपने सपनों को लक्ष्य में बदल सकते हैं।

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