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बीमारी से संघर्ष से अंतरराष्ट्रीय मंच तक: डॉ. तरुण साहू ने सिकल सेल पर शोध से जगाई नई उम्मीद

GANSID सम्मेलन में एम्स रायपुर के डॉ. तरुण साहू ने पेश किया सिकल सेल मरीजों के संज्ञानात्मक स्वास्थ्य पर शोध

by bholuchand news

रायपुर। दृढ़ इच्छाशक्ति, संघर्ष और वैज्ञानिक सोच की प्रेरक मिसाल पेश करते हुए एम्स रायपुर के प्रथम पीएचडी उपाधिधारक डॉ. तरुण साहू ने सिकल सेल रोग पर अपना शोध हैदराबाद में आयोजित GANSID (Global Action Network for Sickle Cell & Other Inherited Blood Disorders) के चौथे सम्मेलन में प्रस्तुत किया। 23 से 25 अक्टूबर तक हैदराबाद इंटरनेशनल कन्वेंशन सेंटर में आयोजित सम्मेलन में उन्होंने मौखिक शोध प्रस्तुति के माध्यम से सिकल सेल मरीजों के मानसिक और संज्ञानात्मक स्वास्थ्य में सुधार की संभावनाएं साझा कीं।

धीमी और गहरी श्वास के अभ्यास पर शोध

डॉ. साहू के शोध का शीर्षक “सिकल सेल रोग में धीमी एवं गहरी श्वास लेने के व्यायाम के संज्ञानात्मक लाभ” था। अध्ययन में सिकल सेल रोग से पीड़ित वयस्क मरीजों पर तीन सप्ताह तक धीमी और गहरी सांस लेने के अभ्यास के प्रभावों का मूल्यांकन किया गया।

शोध के निष्कर्षों में संज्ञानात्मक क्षमता, ध्यान केंद्रित करने और प्रतिक्रिया नियंत्रण से जुड़े मापदंडों में सुधार दर्ज किया गया। अध्ययन के अनुसार, नियमित धीमी एवं गहरी श्वास का अभ्यास सिकल सेल मरीजों के संज्ञानात्मक स्वास्थ्य को बेहतर बनाने की दिशा में एक सरल, कम खर्चीला और संभावनाशील उपाय हो सकता है।

इस शोध को डॉ. रामंजन सिन्हा, डॉ. मीनाक्षी सिन्हा, डॉ. प्रीतम वासनिक, डॉ. एली महापात्र, डॉ. अविनाश इंगले और डॉ. साई टिक्का के मार्गदर्शन में पूरा किया गया। डॉ. तरुण साहू राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय सम्मेलनों में मौखिक शोध प्रस्तुति के लिए प्रथम पुरस्कार भी प्राप्त कर चुके हैं।

व्यक्तिगत संघर्ष को बनाया शोध की प्रेरणा

डॉ. तरुण साहू स्वयं सिकल सेल वॉरियर हैं। बीमारी की चुनौतियों को व्यक्तिगत रूप से अनुभव करने के बावजूद उन्होंने वैज्ञानिक अनुसंधान को अपना माध्यम बनाया, ताकि सिकल सेल से प्रभावित लोगों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने में योगदान दे सकें। उनकी यात्रा दिखाती है कि व्यक्तिगत संघर्ष को समाज के हित में किए जाने वाले काम की प्रेरणा बनाया जा सकता है।

सिकल केयर फाउंडेशन की टीम भी सम्मेलन में शामिल

अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में रायपुर स्थित सिकल केयर फाउंडेशन की संस्थापक सुश्री नेहा वर्मा और सह-संस्थापक सुश्री पल्लवी वर्मा भी उपस्थित रहीं। फाउंडेशन की टीम की सदस्य श्रीमती ज्योति साहू और सुश्री पलक वर्मा ने भी सम्मेलन में सहभागिता की। उनकी उपस्थिति ने मरीज-केंद्रित दृष्टिकोण, जागरूकता और सामूहिक प्रयासों के महत्व को रेखांकित किया।

सिकल केयर फाउंडेशन मरीजों और देखभालकर्ताओं पर केंद्रित एक गैर-सरकारी संगठन है। यह सिकल सेल रोग के प्रति जागरूकता बढ़ाने, मरीजों और उनके परिवारों को सहयोग देने तथा स्वास्थ्य सेवाओं तक उनकी पहुंच बेहतर बनाने के लिए काम करता है। संगठन बीमारी से जुड़े सामाजिक भेदभाव और कलंक को कम करने, जरूरी जानकारी एवं मार्गदर्शन उपलब्ध कराने और मरीजों के जीवन की गुणवत्ता सुधारने के प्रयासों में जुटा है।

GANSID जैसे अंतरराष्ट्रीय मंच पर शोधकर्ताओं, स्वास्थ्य विशेषज्ञों और मरीज-केंद्रित संगठनों की सहभागिता सिकल सेल रोग की चुनौतियों को समझने और उनके समाधान के लिए साझा प्रयासों को बढ़ावा देती है। ऐसे सम्मेलनों में वैज्ञानिक शोध और जमीनी अनुभवों का आदान-प्रदान मरीजों की जरूरतों के अनुरूप बेहतर सहयोग और भविष्य की संभावनाएं विकसित करने में मददगार हो सकता है।

डॉ. तरुण साहू की उपलब्धि छत्तीसगढ़ के लिए गौरव का विषय है और सिकल सेल से प्रभावित लोगों के लिए प्रेरणा भी। उनकी यात्रा यह संदेश देती है कि बीमारी किसी व्यक्ति की पहचान या संभावनाओं को सीमित नहीं करती। शिक्षा, दृढ़ संकल्प और सही दिशा में प्रयास से व्यक्तिगत अनुभव दूसरों के लिए उम्मीद और बदलाव का माध्यम बन सकता है। वहीं, सिकल केयर फाउंडेशन की सहभागिता बताती है कि वैज्ञानिक शोध, मरीजों की आवाज और सामाजिक जागरूकता मिलकर सिकल सेल समुदाय के बेहतर भविष्य की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

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