बिजली उपभोक्ताओं के लिए एक महत्वपूर्ण अपडेट सामने आया है। बिजली नियामक आयोग ने फ्यूल एंड पावर परचेज एडजस्टमेंट कॉस्ट (PPAC) में बढ़ोतरी को मंजूरी दे दी है। इस फैसले के बाद अधिक बिजली खपत करने वाले उपभोक्ताओं के मासिक बिल में बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है। हालांकि राहत की बात यह है कि 500 यूनिट तक मासिक बिजली खपत करने वाले घरेलू उपभोक्ताओं को इस अतिरिक्त शुल्क से बाहर रखा गया है।
500 यूनिट तक खपत पर नहीं लगेगा अतिरिक्त शुल्क
नए आदेश के अनुसार, जो घरेलू उपभोक्ता हर महीने 500 यूनिट या उससे कम बिजली का उपयोग करते हैं, उन्हें किसी भी प्रकार का अतिरिक्त फ्यूल सरचार्ज नहीं देना होगा। इससे मध्यमवर्गीय और सामान्य परिवारों पर आर्थिक बोझ नहीं बढ़ेगा।
ज्यादा बिजली खर्च करने वालों पर बढ़ेगा असर
बिजली दरों में यह वृद्धि मुख्य रूप से उन उपभोक्ताओं को प्रभावित करेगी, जिनकी मासिक खपत 500 यूनिट से अधिक है। गर्मी के मौसम में एसी, कूलर, गीजर और अन्य विद्युत उपकरणों का अधिक उपयोग करने वाले परिवारों के बिजली बिल में वृद्धि हो सकती है। नए प्रावधानों के तहत बिजली दरों में 1 प्रतिशत से लेकर 3.30 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी की गई है।
सब्सिडी लाभार्थियों को मिलेगी राहत
दिल्ली सरकार की बिजली सब्सिडी योजना का लाभ लेने वाले उपभोक्ताओं पर इस फैसले का कोई विशेष प्रभाव नहीं पड़ेगा। 200 से 500 यूनिट तक बिजली उपयोग करने वाले पात्र उपभोक्ता पहले की तरह सब्सिडी का लाभ लेते रहेंगे। इससे लाखों परिवारों को बढ़े हुए बिजली बिल की चिंता नहीं करनी पड़ेगी।
क्यों बढ़ाया गया फ्यूल सरचार्ज?
बिजली वितरण कंपनियों का कहना है कि कोयला, ईंधन और बिजली उत्पादन की लागत में लगातार वृद्धि हुई है। बढ़ते खर्च को देखते हुए कंपनियां लंबे समय से फ्यूल सरचार्ज बढ़ाने की मांग कर रही थीं। इसी मांग को ध्यान में रखते हुए नियामक आयोग ने यह निर्णय लिया है।
सीमित उपभोक्ताओं पर ही पड़ेगा प्रभाव
विशेषज्ञों का मानना है कि इस फैसले का असर मुख्य रूप से उच्च बिजली खपत वाले उपभोक्ताओं पर ही पड़ेगा। अधिकांश घरेलू उपभोक्ता और सब्सिडी प्राप्त करने वाले परिवार इससे प्रभावित नहीं होंगे।

