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मेधावी छात्रों के साथ सरकार का बड़ा यू-टर्न

मेधावी छात्रों के साथ सरकार का बड़ा यू-टर्न: पहले सभी मेरिट बच्चों को IPL दिखाने का था आदेश, अब सिर्फ 10 को मिलेगा मौका

by Mulchand Kashyap

रायपुर: मेधावी छात्रों को सम्मान देने के नाम पर जारी सरकारी घोषणा अब सवालों के घेरे में आ गई है। 10 मई को रायपुर में होने वाले आईपीएल मैच को लेकर पहले शिक्षा विभाग ने मेरिट सूची में स्थान बनाने वाले सभी 85 छात्रों को मैच दिखाने का फैसला किया था, लेकिन अब अचानक आदेश बदलते हुए केवल 10 छात्रों को ही स्टेडियम भेजने की तैयारी कर ली गई है। इस फैसले के बाद छात्रों और अभिभावकों में नाराजगी बढ़ गई है। लोग सवाल उठा रहे हैं कि जब सभी छात्रों को ले जाने की व्यवस्था ही नहीं थी, तो फिर इतनी बड़ी घोषणा आखिर क्यों की गई?

पहले “सर्वोच्च प्राथमिकता”, अब सिर्फ 10 छात्रों की एंट्री

3 मई को लोक शिक्षण संचालनालय ने सभी जिला शिक्षा अधिकारियों को आदेश जारी कर कहा था कि मेरिट सूची में स्थान बनाने वाले विद्यार्थियों को एक शिक्षक के साथ राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद भेजा जाए। आदेश में इस काम को “सर्वोच्च प्राथमिकता” देने तक की बात कही गई थी। इस घोषणा के बाद राज्यभर के मेधावी छात्रों में खुशी का माहौल था। खासकर दूरस्थ और ग्रामीण इलाकों से आने वाले छात्र पहली बार आईपीएल मैच स्टेडियम में देखने को लेकर उत्साहित थे। कई छात्रों ने रायपुर आने की तैयारी भी शुरू कर दी थी। लेकिन कुछ ही दिनों बाद पूरा मामला बदल गया।

नया आदेश आया, 85 में से 75 छात्रों का नाम बाहर

अब विभाग ने नया आदेश जारी कर साफ कर दिया है कि केवल 10 छात्र ही मैच देख पाएंगे। इनमें 10वीं के 5 और 12वीं के 5 छात्र शामिल हैं। बाकी 75 छात्रों को इस अवसर से बाहर कर दिया गया है। सूत्रों के अनुसार चयनित छात्रों की सूची संबंधित जिला शिक्षा अधिकारियों को भेज दी गई है। इसके बाद बाकी छात्रों की उम्मीदें टूट गईं।

छात्रों में नाराजगी, बोले- पहले उम्मीद क्यों जगाई?

नए आदेश के बाद कई छात्र खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं। छात्रों का कहना है कि पहले बड़े स्तर पर घोषणा कर उत्साह बढ़ाया गया और फिर अंतिम समय में फैसला बदल दिया गया।सूत्रों के अनुसार कुछ छात्रों ने नाराजगी जताते हुए कहा कि अगर टिकट की व्यवस्था नहीं थी तो पहले घोषणा ही नहीं करनी चाहिए थी। छात्रों का कहना है कि उनकी भावनाओं के साथ मजाक किया गया है।

टिकट नहीं मिले तो बदल दिया आदेश?

अंदरूनी सूत्रों की मानें तो शिक्षा विभाग सभी 85 छात्रों के लिए आईपीएल मैच के टिकट का इंतजाम नहीं कर पाया। शुरुआत में योजना थी कि मेरिट सूची में स्थान बनाने वाले सभी छात्रों को मैच दिखाया जाएगा, लेकिन टिकट उपलब्ध नहीं होने के कारण विभाग को अपना ही आदेश बदलना पड़ा। अब सवाल यह उठ रहा है कि बिना तैयारी के इतनी बड़ी घोषणा क्यों कर दी गई? क्या विभाग ने पहले घोषणा की और बाद में व्यवस्था तलाशना शुरू किया?

पहले हेलीकॉप्टर राइड, अब टिकट भी मुश्किल

पूर्व सरकार के समय मेरिट छात्रों को प्रोत्साहन राशि के साथ हेलीकॉप्टर भ्रमण जैसी सुविधाएं भी दी जाती थीं। अब स्थिति यह है कि आईपीएल मैच दिखाने की घोषणा तो कर दी गई, लेकिन सभी छात्रों के लिए टिकट तक उपलब्ध नहीं हो पाए। सूत्रों का कहना है कि हेलीकॉप्टर भ्रमण की जगह छात्रों को अलग तरीके से प्रोत्साहित करने की योजना बनाई गई थी, लेकिन वह भी अधूरी नजर आ रही है।

अधिकारी बोले- जो आदेश मिला, वही कर रहे

रायपुर जिला शिक्षा अधिकारी हिमांशु भारतीय ने कहा कि लोक शिक्षण संचालनालय से जो निर्देश प्राप्त हुए हैं, उसी के अनुसार कार्रवाई की जा रही है। विभाग से जिन छात्रों की सूची भेजी गई है, केवल वही छात्र आईपीएल मैच देखने जाएंगे।

अब सरकार से उठ रहे कई सवाल

इस पूरे मामले ने शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। क्या पहले सिर्फ प्रचार के लिए घोषणा की गई थी? क्या विभाग के पास पहले से कोई स्पष्ट योजना नहीं थी? और सबसे बड़ा सवाल—मेधावी छात्रों को सम्मान देने का दावा आखिर कागजों तक ही सीमित क्यों रह गया? फिलहाल, आईपीएल मैच देखने का इंतजार कर रहे 75 छात्रों की उम्मीदें टूट चुकी हैं और सरकार का यह फैसला अब चर्चा का बड़ा विषय बन गया है।

 

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