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महंगाई के बीच केंद्र सरकार का बड़ा फैसला, सितंबर तक चीनी निर्यात पर रोक

by Mulchand Kashyap

देश में बढ़ती महंगाई और घरेलू मांग को देखते हुए केंद्र सरकार ने चीनी निर्यात पर बड़ा कदम उठाया है। सरकार ने 30 सितंबर 2026 तक या अगले आदेश तक चीनी के निर्यात पर पूर्ण प्रतिबंध लागू कर दिया है। विदेश व्यापार महानिदेशालय (DGFT) की ओर से जारी नई अधिसूचना के बाद अब चीनी निर्यात केवल विशेष अनुमति के आधार पर ही संभव होगा।

DGFT ने बदली Export Policy, चीनी को ‘Restricted’ Category में डाला

नई नीति के तहत चीनी को अब ‘मुक्त’ श्रेणी से हटाकर ‘प्रतिबंधित’ श्रेणी में शामिल कर दिया गया है। इसका मतलब है कि अब किसी भी प्रकार के चीनी निर्यात के लिए सरकार की मंजूरी अनिवार्य होगी। इस फैसले का उद्देश्य घरेलू बाजार में आपूर्ति को मजबूत रखना और कीमतों को नियंत्रित करना है।

Domestic Supply और Festival Demand पर सरकार की नजर

सरकार का फोकस आने वाले त्योहारी सीजन और घरेलू जरूरतों को ध्यान में रखते हुए पर्याप्त स्टॉक बनाए रखने पर है। हाल के महीनों में वैश्विक बाजार में उतार-चढ़ाव के कारण कीमतों में अस्थिरता देखी गई थी। ऐसे में भारत सरकार चाहती है कि घरेलू उपभोक्ताओं पर इसका असर न पड़े।

किन मामलों में जारी रहेगा Sugar Export?

हालांकि सामान्य निर्यात पर रोक लगाई गई है, लेकिन कुछ विशेष श्रेणियों को छूट दी गई है। EU और USA को CXL और TRQ कोटे के तहत निर्यात जारी रहेगा। इसके अलावा Advance Authorization Scheme (AAS) और सरकार-से-सरकार (G2G) समझौतों के तहत होने वाले शिपमेंट भी इस प्रतिबंध से बाहर रहेंगे। पहले से प्रक्रिया में मौजूद खेपों को भी अनुमति दी गई है।

Domestic Market में कीमतें घटने की उम्मीद

विशेषज्ञों का मानना है कि इस निर्णय से देश में चीनी की उपलब्धता बढ़ेगी, जिससे खुदरा कीमतों में स्थिरता या गिरावट आ सकती है। भारत दुनिया के सबसे बड़े चीनी उत्पादकों में शामिल है, इसलिए निर्यात रोकने का सीधा असर घरेलू बाजार पर पड़ने की संभावना है।

Exporters और Industry पर बढ़ेगा दबाव

इस फैसले से चीनी निर्यातकों और मिलों को अल्पकालिक चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है, क्योंकि कई अंतरराष्ट्रीय कॉन्ट्रैक्ट प्रभावित होंगे। हालांकि सरकार का कहना है कि प्राथमिकता देश के उपभोक्ताओं को सस्ती और पर्याप्त आपूर्ति उपलब्ध कराना है। आगे उत्पादन और स्टॉक की स्थिति के आधार पर नीति की समीक्षा की जा सकती है।

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