अंतर्राष्ट्रीय बाल श्रम निषेध दिवस के अवसर पर महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े ने प्रदेशवासियों से बाल श्रम उन्मूलन के लिए सामूहिक प्रयास करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि प्रत्येक बच्चे को सुरक्षित, सम्मानजनक और खुशहाल बचपन मिलना उसका मौलिक अधिकार है तथा समाज की जिम्मेदारी है कि बच्चों को शिक्षा, संस्कार और विकास के अवसर उपलब्ध कराए जाएं।
मंत्री श्रीमती राजवाड़े ने कहा कि बच्चे देश का भविष्य हैं और उनके हाथों में किताबें, खेलकूद तथा रचनात्मक अवसर होने चाहिए, न कि मजदूरी का बोझ। बाल श्रम बच्चों के अधिकारों का हनन है, जो उनके शिक्षा, स्वास्थ्य और सर्वांगीण विकास के अवसरों को छीन लेता है। उन्होंने कहा कि किसी भी बच्चे से मजदूरी कराना उसके सपनों और संभावनाओं को सीमित करने जैसा है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि बाल श्रम केवल एक सामाजिक बुराई नहीं बल्कि कानूनन दंडनीय अपराध भी है। राज्य सरकार बाल श्रम, बाल तस्करी और बच्चों के शोषण जैसी कुप्रथाओं के विरुद्ध लगातार कार्रवाई कर रही है तथा बच्चों के संरक्षण और शिक्षा के अधिकार को सुनिश्चित करने के लिए विभिन्न योजनाएं संचालित कर रही है।
मंत्री ने कहा कि सरकार के प्रयास तभी सफल होंगे जब समाज का हर व्यक्ति इस अभियान में सहभागी बने। यदि किसी बच्चे से अवैध रूप से कार्य कराया जा रहा हो, उसे शिक्षा से वंचित रखा जा रहा हो या उसके साथ किसी प्रकार का शोषण हो रहा हो, तो इसकी सूचना तत्काल संबंधित विभागों को दी जानी चाहिए।
उन्होंने नागरिकों से अपील करते हुए कहा कि ऐसे मामलों की जानकारी पुलिस, चाइल्ड हेल्पलाइन 1098, महिला एवं बाल विकास विभाग अथवा स्थानीय प्रशासन को दें, ताकि बच्चों को सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराया जा सके।
श्रीमती राजवाड़े ने कहा कि एक जागरूक और संवेदनशील समाज ही बच्चों को बेहतर भविष्य दे सकता है। उन्होंने सभी नागरिकों से संकल्प लेने का आह्वान किया कि किसी भी बच्चे का बचपन श्रम में नहीं बल्कि शिक्षा, सुरक्षा, संस्कार और अवसरों के साथ विकसित हो, जिससे वे अपने सपनों को साकार कर राष्ट्र निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान दे सकें।
उन्होंने कहा कि अंतर्राष्ट्रीय बाल श्रम निषेध दिवस केवल एक दिवस नहीं, बल्कि बच्चों के अधिकारों की रक्षा और उन्हें बेहतर भविष्य देने की दिशा में समाज को जागरूक करने का अवसर है।

