देश के ग्रामीण और कृषि क्षेत्र में बढ़ते तनाव के बीच किसानों का असंतोष एक बार फिर सामने आ रहा है। न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP), बढ़ती ईंधन कीमतों और खरीफ सीजन से पहले खाद की कमी जैसे मुद्दों ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। इसी बीच संयुक्त किसान मोर्चा (SKM) ने 27 मई 2026 से देशभर में बड़े आंदोलन की शुरुआत करने का ऐलान किया है। किसान संगठनों का कहना है कि यदि सरकार ने उनकी मांगों पर जल्द ठोस कदम नहीं उठाए, तो आंदोलन को और अधिक व्यापक रूप दिया जाएगा।
MSP व्यवस्था पर किसानों के गंभीर आरोप
संयुक्त किसान मोर्चा ने मौजूदा MSP प्रणाली को किसानों के हितों के खिलाफ बताते हुए सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि घोषित न्यूनतम समर्थन मूल्य, वास्तविक खेती लागत की तुलना में काफी कम है, जिससे किसानों को उनकी उपज का उचित लाभ नहीं मिल पा रहा है। किसानों के अनुसार, उत्पादन लागत लगातार बढ़ रही है लेकिन MSP में उसी अनुपात में बढ़ोतरी नहीं की जा रही।
खेती की बढ़ती लागत ने बढ़ाई मुश्किलें
पेट्रोल, डीजल और सीएनजी की बढ़ती कीमतों ने खेती को और महंगा बना दिया है। खेत की तैयारी से लेकर फसल की ढुलाई तक हर चरण पर खर्च बढ़ने से किसानों की आर्थिक स्थिति पर दबाव बढ़ रहा है। इसका सबसे ज्यादा असर छोटे और मध्यम किसानों पर पड़ रहा है।
खरीफ सीजन से पहले खाद संकट पर नाराजगी
कई राज्यों में खरीफ सीजन की बुवाई से पहले यूरिया और डीएपी खाद की कमी की शिकायतें सामने आई हैं। किसानों का आरोप है कि सहकारी समितियों से समय पर खाद नहीं मिल रही, जबकि निजी बाजारों में महंगे दामों पर बिक्री और कालाबाजारी की स्थिति बनी हुई है। संयुक्त किसान मोर्चा ने संकेत दिया है कि यदि उनकी मांगें नहीं मानी गईं तो आंदोलन को दिल्ली सीमा आंदोलन 2021-22 की तर्ज पर देशव्यापी रूप दिया जाएगा।
किसानों की प्रमुख मांगें
किसानों ने सरकार के सामने चार मुख्य मांगें रखी हैं—MSP की कानूनी गारंटी, कृषि ईंधन पर राहत, खाद की पर्याप्त उपलब्धता और खेती से जुड़े इनपुट्स की बढ़ती लागत पर नियंत्रण। किसान संगठनों का कहना है कि जब तक इन मुद्दों का समाधान नहीं होता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।

