छत्तीसगढ़ सरकार ने सड़क पर जीवन यापन कर रहे बच्चों को सुरक्षित वातावरण, शिक्षा और बेहतर भविष्य से जोड़ने के लिए बड़ा कदम उठाया है। राज्य में 1 जून से 30 जून 2026 तक विशेष अभियान चलाया जाएगा, जिसके तहत भिक्षावृत्ति, बाल श्रम, कचरा बीनने और सड़क जैसी परिस्थितियों में रह रहे बच्चों की पहचान कर उनका रेस्क्यू और पुनर्वास किया जाएगा।
महिला एवं बाल विकास विभाग के अनुसार यह अभियान “बाल सक्षम नीति 2022” के तहत संचालित किया जाएगा। सरकार का उद्देश्य ऐसे बच्चों को मुख्यधारा से जोड़ते हुए उन्हें सुरक्षित बचपन और सम्मानजनक जीवन उपलब्ध कराना है।
अभियान के दौरान चिन्हित बच्चों को शिक्षा, स्वास्थ्य सुविधा, आश्रय और सामाजिक सुरक्षा योजनाओं से जोड़ा जाएगा। साथ ही जरूरत के अनुसार उनका पुनर्वास भी किया जाएगा। शासन ने इन बच्चों को किशोर न्याय अधिनियम 2015 के तहत “देखरेख एवं संरक्षण की आवश्यकता वाले बालक” की श्रेणी में रखते हुए उनके स्थायी संरक्षण को प्राथमिकता देने की बात कही है।
जिलों में बनेगी विशेष रेस्क्यू टीम
अभियान को प्रभावी बनाने के लिए सभी जिलों में कलेक्टरों के नेतृत्व में विशेष रेस्क्यू टीमों का गठन किया जाएगा। अलग-अलग विभागों के अधिकारियों को जिम्मेदारी सौंपी जाएगी ताकि जरूरतमंद बच्चों तक समय पर मदद पहुंच सके।सरकार द्वारा ऐसे स्थानों को चिन्हित किया जाएगा जहां बड़ी संख्या में बच्चे सड़क जैसी परिस्थितियों में रह रहे हैं। वहां विशेष अभियान चलाकर बच्चों को सुरक्षित संरक्षण उपलब्ध कराया जाएगा।
शिक्षा और पुनर्वास पर रहेगा जोर
रेस्क्यू किए गए बच्चों को बाल कल्याण समिति के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा। बच्चों की स्थिति को देखते हुए उन्हें परिवार के साथ पुनर्स्थापन, संस्थागत देखभाल या अन्य पुनर्वास सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी।प्रत्येक बच्चे के लिए अलग से सामाजिक जांच रिपोर्ट और देखरेख योजना तैयार की जाएगी, ताकि उन्हें लगातार शिक्षा और संरक्षण मिल सके।
परिवारों को भी मिलेगी सहायता
सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि केवल बच्चों ही नहीं, बल्कि उनके परिवारों को भी विभिन्न शासकीय योजनाओं से जोड़ा जाएगा। इसका उद्देश्य आर्थिक मजबूरी के कारण बच्चों को दोबारा सड़क पर आने से रोकना है।
कई विभाग मिलकर करेंगे काम
इस अभियान में जिला प्रशासन, पुलिस विभाग, श्रम विभाग, शिक्षा विभाग, स्वास्थ्य विभाग, रेलवे, पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग, समाज कल्याण विभाग, चाइल्ड लाइन और स्वयंसेवी संस्थाओं का सहयोग लिया जाएगा।
राज्य शासन ने कहा है कि यह केवल एक महीने का अभियान नहीं होगा, बल्कि बच्चों के संरक्षण और पुनर्वास की प्रक्रिया लगातार जारी रहेगी।
बाल स्वराज पोर्टल पर होगी निगरानी
मिशन वात्सल्य के तहत बाल स्वराज पोर्टल पर बच्चों की जानकारी अपडेट की जाएगी और पूरे वर्ष उनकी निगरानी एवं पुनर्वास की प्रक्रिया जारी रखी जाएगी, ताकि कोई भी बच्चा फिर से असुरक्षित परिस्थितियों में न पहुंचे।

