रायपुर, 29 सितंबर 2026। कभी नक्सल हिंसा और भय की खबरों के कारण चर्चा में रहने वाला बस्तर अब शांति, विकास, पर्यटन और आत्मनिर्भरता की नई तस्वीर पेश कर रहा है। इसी बदलते बस्तर को करीब से देखने और समझने के लिए दिल्ली से आए 43 इंफ्लुएंसर्स और डिजिटल कंटेंट क्रिएटर्स ने क्षेत्र का भ्रमण किया।
बस्तर प्रवास के दौरान इंफ्लुएंसर्स ने नेतानार स्थित शहीद वीर गुंडाधुर सेवा डेरा का दौरा किया। यहां उन्होंने स्थानीय महिलाओं के लिए संचालित सिलाई-कढ़ाई और अन्य स्वरोजगार गतिविधियों को करीब से देखा। प्रशिक्षण केंद्र में महिलाओं को रोजगार से जोड़ने के लिए दिए जा रहे प्रशिक्षण और उनके अनुभवों की जानकारी भी ली।
महिलाओं के हाथों में हुनर, आत्मनिर्भरता की ओर कदम
नेतानार में महिलाओं को सिलाई-कढ़ाई सहित विभिन्न स्वरोजगार गतिविधियों का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इसका उद्देश्य स्थानीय महिलाओं को उनके हुनर से रोजगार जोड़ने और परिवार की आय में योगदान देने के अवसर उपलब्ध कराना है। दिल्ली से पहुंचे इंफ्लुएंसर्स ने प्रशिक्षण प्राप्त कर रही महिलाओं से बातचीत की और उनके अनुभवों को जाना। महिलाओं ने प्रशिक्षण के दौरान मिले अवसरों और स्वरोजगार से जुड़ने के बाद आए बदलावों के बारे में जानकारी साझा की।
प्रशिक्षण केंद्र में चलती सिलाई मशीनें और काम सीखती महिलाएं बस्तर में स्थानीय स्तर पर रोजगार एवं कौशल विकास की गतिविधियों की तस्वीर पेश कर रही थीं। इंफ्लुएंसर्स ने इन गतिविधियों को अपने कैमरों में भी दर्ज किया।
शहीद वीर गुंडाधुर की ऐतिहासिक विरासत से हुए परिचित
नेतानार भ्रमण के दौरान इंफ्लुएंसर्स ने बस्तर के वर्तमान सामाजिक बदलाव के साथ-साथ क्षेत्र के इतिहास और सांस्कृतिक विरासत को भी जाना। उन्होंने शहीद वीर गुंडाधुर के जीवन, उनके योगदान और बस्तर के इतिहास में उनके महत्व के बारे में जानकारी प्राप्त की। नेतानार में ऐतिहासिक विरासत और वर्तमान समय में संचालित स्वरोजगार गतिविधियों का एक साथ अनुभव इंफ्लुएंसर्स के लिए बस्तर को समझने का अलग अवसर रहा।
जमीन पर पहुंचकर बस्तर को समझने का अवसर
दिल्ली से आए डिजिटल कंटेंट क्रिएटर्स ने बस्तर के लोगों से संवाद कर क्षेत्र के सामाजिक और सांस्कृतिक पहलुओं को समझा। भ्रमण के दौरान उन्होंने स्थानीय लोगों की जीवनशैली, महिलाओं की स्वरोजगार गतिविधियों, ऐतिहासिक स्थलों तथा बस्तर की प्राकृतिक और सांस्कृतिक पहचान को करीब से देखा। इस भ्रमण के माध्यम से कंटेंट क्रिएटर्स को बस्तर को केवल खबरों के माध्यम से नहीं, बल्कि क्षेत्र में पहुंचकर प्रत्यक्ष रूप से देखने और समझने का अवसर मिला।
सोशल मीडिया के जरिए देश-दुनिया तक पहुंचेगी बस्तर की कहानी
बस्तर भ्रमण के दौरान दिल्ली से आए 43 इंफ्लुएंसर्स और डिजिटल कंटेंट क्रिएटर्स ने फोटो, वीडियो और अन्य डिजिटल सामग्री तैयार की। उनके डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से बस्तर के पर्यटन स्थलों, स्थानीय संस्कृति, इतिहास, लोगों की जीवनशैली और क्षेत्र में हो रहे बदलावों की जानकारी व्यापक दर्शकों तक पहुंचने की संभावना है। डिजिटल माध्यमों के बढ़ते प्रभाव के बीच कंटेंट क्रिएटर्स के प्रत्यक्ष अनुभव किसी क्षेत्र की सामाजिक और सांस्कृतिक तस्वीर को देश के अलग-अलग हिस्सों तक पहुंचाने का माध्यम बन रहे हैं।
पर्यटन, संस्कृति और आत्मनिर्भरता से जुड़ रही बस्तर की पहचान
बस्तर अपनी आदिवासी संस्कृति, ऐतिहासिक विरासत, प्राकृतिक सौंदर्य और पर्यटन स्थलों के लिए जाना जाता है। नेतानार में महिलाओं के लिए संचालित कौशल और स्वरोजगार गतिविधियां स्थानीय स्तर पर आत्मनिर्भरता की दिशा में किए जा रहे प्रयासों को सामने लाती हैं। दिल्ली से आए इंफ्लुएंसर्स के भ्रमण में बस्तर की ऐतिहासिक विरासत के साथ-साथ वर्तमान सामाजिक गतिविधियों की तस्वीर भी सामने आई। उनके द्वारा तैयार की जा रही डिजिटल सामग्री के माध्यम से बस्तर के अलग-अलग पहलुओं को लोगों तक पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है। बस्तर की यह तस्वीर इतिहास, संस्कृति, प्रकृति, पर्यटन, शांति और स्थानीय स्तर पर आत्मनिर्भरता के प्रयासों को एक साथ सामने लाती है।
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