Home latestभगवान बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती पर रायपुर में आयोजित
raipur-hul-kranti-diwas-birsa-munda-150th-jayanti-dr-asha-lakra.jpg

भगवान बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती पर रायपुर में आयोजित

रायपुर में भगवान बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती पर हुल क्रांति दिवस मनाया गया। डॉ. आशा लकड़ा ने जनसुनवाई कर जनजातीय समाज की समस्याएं सुनीं।

by Bholuchand News

रायपुर, 01 जुलाई 2026। भगवान बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती के अवसर पर सरगुजा जिले के अंबिकापुर स्थित पीजी कॉलेज ऑडिटोरियम में हुल क्रांति दिवस का गरिमामय आयोजन किया गया। जिला प्रशासन सरगुजा एवं आदिम जाति विकास विभाग के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस कार्यक्रम में जनजातीय समाज की समृद्ध संस्कृति, इतिहास और बलिदान को श्रद्धापूर्वक याद किया गया। कार्यक्रम में लगभग 1,500 लोगों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।

कार्यक्रम की मुख्य अतिथि राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग, भारत सरकार की सदस्य डॉ. आशा लकड़ा रहीं। उनके साथ विभिन्न जनजातीय समाजों के प्रतिनिधि, समाज प्रमुख, जनप्रतिनिधि एवं बड़ी संख्या में गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।

raipur-hul-kranti-diwas-birsa-munda-150th-jayanti-dr-asha-lakra.jpg

कार्यक्रम की शुरुआत भगवान बिरसा मुंडा, वीर शहीद नारायण सिंह, मांझी राम गोड़, सिद्धू-कान्हू, समाज सुधारक राजमोहनी देवी, संत गहिरा गुरु और जगदेव राम उरांव के चित्रों पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुई। इसके बाद विभिन्न जनजातीय समाजों के प्रतिनिधियों ने पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ डॉ. आशा लकड़ा का आत्मीय स्वागत किया।

अपने संबोधन में डॉ. आशा लकड़ा ने कहा कि राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग देशभर के अनुसूचित जनजाति समुदायों के संवैधानिक अधिकारों की रक्षा तथा उनके सामाजिक, आर्थिक एवं शैक्षणिक विकास के लिए निरंतर कार्य कर रहा है। उन्होंने भगवान बिरसा मुंडा के संघर्ष, नेतृत्व और जनजातीय अस्मिता की रक्षा में उनके ऐतिहासिक योगदान को याद करते हुए हुल क्रांति के महानायक सिद्धू-कान्हू के अद्वितीय बलिदान को श्रद्धांजलि अर्पित की।

कार्यक्रम के दौरान डॉ. आशा लकड़ा ने जनसुनवाई भी आयोजित की, जिसमें विभिन्न जनजातीय समाजों के प्रतिनिधियों ने शिक्षा, भूमि, आजीविका, वन अधिकार और अन्य स्थानीय समस्याओं से जुड़े मुद्दे उनके समक्ष रखे। उन्होंने संबंधित विषयों पर गंभीरता से विचार करते हुए आवश्यक कार्रवाई और समाधान का भरोसा दिलाया।

इस आयोजन में उरांव, कंवर, मांझी, गोंड, खैरवार, पंडो, नागवंशी, मझवार, नगेसिया, कोरवा, बिंझिया, मुंडा, भुईया एवं पहाड़ी कोरवा सहित जिले के 14 जनजातीय समाजों के प्रतिनिधियों ने सहभागिता की।

कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य नई पीढ़ी को जनजातीय समाज के गौरवशाली इतिहास, स्वतंत्रता संग्राम में उनके योगदान, सांस्कृतिक विरासत और सामाजिक मूल्यों से परिचित कराना था। वक्ताओं ने कहा कि भगवान बिरसा मुंडा और हुल क्रांति के वीरों का संघर्ष आज भी समाज को आत्मसम्मान, एकता और अधिकारों के प्रति जागरूक रहने की प्रेरणा देता है।

जिला प्रशासन ने कहा कि ऐसे आयोजन जनजातीय संस्कृति के संरक्षण के साथ-साथ समाज में जागरूकता और सामाजिक समरसता को भी मजबूत करते हैं।


छत्तीसगढ़ की ताज़ा ख़बरों के लिए जुड़ रहे,भोलूचंद.कॉम के साथ |


राष्ट्रीय चिकित्सक दिवस : डॉक्टर केवल मरीजों का ही नहीं, पूरे समाज के स्वास्थ्य का आधार हैं – डॉ. संदीप दवे

You may also like