रायपुर, 19 जून 2026
परिवार से बिछड़कर वृद्धाश्रम में जीवन बिता रही 70 वर्षीय लच्छनी बाई की जिंदगी में आखिरकार खुशियों ने दस्तक दी। करीब दो वर्षों बाद उनका अपने बेटे से मिलन हुआ और भावुक माहौल के बीच परिवार उन्हें सम्मानपूर्वक वापस अपने घर ले गया। यह संभव हो सका जिला विधिक सेवा प्राधिकरण महासमुंद की संवेदनशील पहल और समझाइश से।

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राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (NALSA) के ‘करूणा’ एवं वरिष्ठ नागरिक अधिकार सशक्तिकरण अभियान के तहत जिला विधिक सेवा प्राधिकरण महासमुंद की प्रभारी सचिव एवं मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट सुश्री चेतना ठाकुर आशियाना वृद्धाश्रम पहुंचीं। यहां आयोजित विधिक जागरूकता शिविर के दौरान उन्होंने वरिष्ठ नागरिकों से बातचीत की। इसी दौरान लच्छनी बाई ने अपने परिवार से बिछड़ने की दर्दभरी कहानी साझा की।
लच्छनी बाई ने बताया कि तीन बेटों के बीच लंबे समय से चल रहे पारिवारिक विवाद और तनाव के कारण उन्होंने स्वयं घर छोड़ दिया था। भटकते-भटकते उन्हें आशियाना वृद्धाश्रम में आश्रय मिला, जहां वे पिछले दो वर्षों से रह रही थीं।
मामले को गंभीरता से लेते हुए प्रभारी सचिव सुश्री चेतना ठाकुर ने अधिकार मित्र जितेंद्र पटेल की मदद से परिजनों का पता लगवाया और उन्हें जिला विधिक सेवा प्राधिकरण कार्यालय बुलाया। यहां परिवार के सदस्यों को वृद्ध मां के प्रति उनके कानूनी और नैतिक दायित्वों की जानकारी दी गई तथा सम्मान और संवेदनशीलता के साथ उनकी देखभाल करने के लिए प्रेरित किया गया।
समझाइश का सकारात्मक असर हुआ और लच्छनी बाई के बेटे एवं पुत्रवधु उन्हें अपने साथ घर ले जाने के लिए तैयार हो गए। वर्षों बाद मां-बेटे का मिलन देखकर वहां मौजूद सभी लोगों की आंखें नम हो गईं।
इस अवसर पर ठाकुर राम दीवान, अधिकार मित्र हरिचंद साहू, आशियाना वृद्धाश्रम की रुचि ठाकुर, भूमिका ध्रुव, साध्या तांडी तथा लीगल एड डिफेंस के कर्मचारी खेलसिंह पटेल भी उपस्थित रहे।
यह पहल इस बात का उदाहरण है कि समय पर संवाद, समझाइश और संवेदनशील प्रयासों से टूटते पारिवारिक रिश्तों को फिर से जोड़ा जा सकता है।

