रायपुर, 13 अक्टूबर 2026। छत्तीसगढ़ के सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले में दहेज प्रताड़ना से परेशान एक महिला के लिए सखी वन स्टॉप सेंटर उम्मीद की किरण बनकर सामने आया है। केंद्र की काउंसलिंग, महिला संरक्षण अधिकारी की पहल और पुलिस विभाग के सहयोग से महिला को न केवल प्रताड़ना से बाहर निकलने में मदद मिली, बल्कि विवाह के दौरान मिले उसके सामान यानी स्त्रीधन को भी सुरक्षित वापस दिलाया गया।
शादी के एक महीने बाद शुरू हुई प्रताड़ना
महिला ने अपने वैवाहिक जीवन की शुरुआत कई सपनों और उम्मीदों के साथ की थी, लेकिन शादी के महज एक महीने बाद ही परिस्थितियां बदलने लगीं। आरोप है कि उसका पति दहेज में स्कूटी की मांग को लेकर उसे मानसिक रूप से प्रताड़ित करने लगा। बेटी का घर बचाने की उम्मीद में मायके पक्ष ने स्कूटी की किस्त भरने की सहमति भी दी, लेकिन इसके बाद पति की मांगें और बढ़ गईं।
महिला के अनुसार, पति मायके से हर महीने 20 हजार रुपये नकद लाने का दबाव बनाने लगा। मांग पूरी नहीं होने पर उसे शारीरिक और मानसिक प्रताड़ना का सामना करना पड़ा। स्थिति इतनी गंभीर हो गई कि उसे मायके जाने से भी रोका जाने लगा।
सखी वन स्टॉप सेंटर ने संभाली जिम्मेदारी
लगातार प्रताड़ना से परेशान महिला ने रिश्ते को बचाने की कई कोशिशें कीं, लेकिन स्थिति में सुधार नहीं हुआ। इसके बाद उसने अलग होने और विवाह में मिले अपने सामान को वापस पाने का फैसला किया।
मामले की गंभीरता को देखते हुए महिला संरक्षण अधिकारी के माध्यम से प्रकरण सखी वन स्टॉप सेंटर को सौंपा गया। केंद्र ने तत्काल कार्रवाई करते हुए महिला के पति की काउंसलिंग की और उसे महिला के कानूनी अधिकारों, सम्मान तथा गरिमा के प्रति जागरूक किया।
इसके बाद सखी केंद्र के अधिकारियों ने पुलिस विभाग के साथ समन्वय कर संयुक्त टीम बनाई, ताकि महिला को उसका सामान सुरक्षित वापस दिलाया जा सके।
पुलिस के सहयोग से वापस मिला पूरा सामान
सखी वन स्टॉप सेंटर की समझाइश और प्रशासनिक हस्तक्षेप के बाद पति विवाह में मिला सामान वापस करने के लिए राजी हो गया। इसके बाद केंद्र के प्रशासकों, पुलिस बल और संबंधित पक्षों की संयुक्त टीम महिला के ससुराल पहुंची। टीम की मौजूदगी में महिला को उसका पूरा सामान सुरक्षित वापस दिलाया गया।
सामान वापस मिलने के बाद महिला और उसके परिवार ने राहत महसूस की तथा सखी वन स्टॉप सेंटर के प्रति आभार व्यक्त किया। यह कार्रवाई संकट में फंसी महिलाओं को सहायता, सुरक्षा और न्याय उपलब्ध कराने में प्रशासनिक समन्वय की अहम भूमिका को दर्शाती है।
104 प्रकरण दर्ज, 86 मामलों का निराकरण
सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले का सखी वन स्टॉप सेंटर संकटग्रस्त महिलाओं को सहायता उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। महिला संरक्षण अधिकारी के अनुसार, केंद्र में अब तक कुल 104 प्रकरण दर्ज किए गए हैं, जिनमें से 86 मामलों का सफलतापूर्वक निराकरण किया जा चुका है।
केंद्र में जरूरतमंद महिलाओं को एक ही छत के नीचे कानूनी सलाह, चिकित्सीय सहायता, पुलिस संरक्षण और मनोवैज्ञानिक परामर्श जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाती हैं।
यह मामला बताता है कि समय पर शिकायत, उचित मार्गदर्शन और संवेदनशील प्रशासनिक सहयोग मिलने से प्रताड़ना का सामना कर रही महिलाओं को अपने अधिकारों और आत्मसम्मान की रक्षा करने में मदद मिल सकती है।
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