बिलासपुर जिला उपभोक्ता आयोग ने कोविड-19 से हुई मृत्यु से जुड़े बीमा विवाद में अहम फैसला सुनाया है। आयोग ने इंश्योरेंस कंपनी को मृतका के आश्रित को 1 करोड़ रुपये की बीमा राशि 12 प्रतिशत वार्षिक ब्याज सहित भुगतान करने के निर्देश दिए हैं।
अनुचित तरीके से खारिज किया गया बीमा दावा
फोरम ने सुनवाई के दौरान माना कि बीमा कंपनी ने बिना ठोस कारण बीमा दावा अस्वीकार कर उपभोक्ता सेवा में गंभीर कमी की। आयोग के अनुसार, इस तरह का रवैया उपभोक्ता संरक्षण कानून का उल्लंघन है। बिलासपुर निवासी कौशल प्रसाद कौशिक ने अपनी पत्नी शैल कौशिक के नाम पर मैक्स लाइफ इंश्योरेंस की पॉलिसी ली थी। पॉलिसी जारी करने से पहले कराई गई मेडिकल जांच में महिला को पूरी तरह स्वस्थ घोषित किया गया था।
कोविड संक्रमण के बाद इलाज के दौरान निधन
सितंबर 2020 में शैल कौशिक कोरोना संक्रमित हुईं। इलाज के दौरान स्वास्थ्य बिगड़ने पर उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां 11 अक्टूबर 2020 को उनकी मृत्यु हो गई। इसके बाद पति ने बीमा क्लेम प्रस्तुत किया।
पूर्व बीमारी का दावा फोरम ने नकारा
बीमा कंपनी ने दावा यह कहकर खारिज किया था कि मृतका पहले से गंभीर बीमारी से पीड़ित थीं। आयोग ने मेडिकल दस्तावेजों के आधार पर इस तर्क को अस्वीकार करते हुए कहा कि, पूर्व बीमारी का कोई प्रमाण नहीं है।
बीमा राशि के साथ मुआवजा भी देना होगा
उपभोक्ता आयोग ने बीमा कंपनी को निर्देश दिया कि—
1 करोड़ रुपये बीमा राशि
12% वार्षिक ब्याज
मानसिक पीड़ा व वाद व्यय हेतु 2 लाख रुपये
पीड़ित परिवार को अदा किए जाएं।


