रायपुर, 29 अगस्त 2026। एन.एच. गोयल वर्ल्ड स्कूल, रायपुर में शनिवार को कम्प्यूटेशनल थिंकिंग और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) विषय पर एक विशाल कार्यशाला का आयोजन किया गया। सीबीएसई क्षेत्रीय कार्यालय द्वारा आयोजित इस कार्यशाला में लगभग 355 शिक्षकों एवं अकादमिक नेतृत्वकर्ताओं ने भाग लिया। कार्यशाला का उद्देश्य शिक्षकों को आधुनिक तकनीक, कम्प्यूटेशनल थिंकिंग और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के शिक्षा के क्षेत्र में बढ़ते उपयोग से परिचित कराना रहा।
कार्यशाला में इस बात पर विशेष जोर दिया गया कि तकनीक को समझना और उसका रचनात्मक एवं प्रभावी उपयोग करना आज की शिक्षा व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुका है। प्रतिभागियों को विद्यार्थियों को तकनीक-सक्षम और भविष्य के लिए तैयार करने के विभिन्न तरीकों की जानकारी दी गई।
विद्यालय प्रबंधन के मार्गदर्शन में हुआ आयोजन

एन.एच. गोयल वर्ल्ड स्कूल, रायपुर में आयोजित CBSE की AI एवं कम्प्यूटेशनल थिंकिंग कार्यशाला में शामिल शिक्षक एवं विशेषज्ञ।
कार्यक्रम की मेजबानी निदेशक प्रशासन एस. के. तोमर और प्राचार्य डॉ. अविनाश पांडेय के मार्गदर्शन में की गई। कार्यशाला के सफल एवं सुचारु संचालन में वरिष्ठ समन्वयक श्वेता दास और विनोद कुमार जून का महत्वपूर्ण योगदान रहा। इसके साथ ही मिली गुप्ता, प्रधानाध्यापिका, जी.डी. ब्लॉक तथा तसनीम नाज़, अर्ली प्रोग्राम हेड ने भी आयोजन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
डॉ. जवाहर सुरिसेट्टी का प्रेरक संबोधन रहा प्रमुख आकर्षण
कार्यशाला का प्रमुख आकर्षण प्रसिद्ध वक्ता डॉ. जवाहर सुरिसेट्टी का मुख्य संबोधन रहा। उन्होंने तकनीकी प्रगति और शिक्षा के बदलते स्वरूप के बीच संबंध को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया। उनके विचारों ने शिक्षकों को तकनीक को केवल एक उपकरण के रूप में देखने के बजाय सृजन, नवाचार और परिवर्तन के माध्यम के रूप में अपनाने के लिए प्रेरित किया।
उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि भविष्य की शिक्षा व्यवस्था में ऐसे शिक्षकों की भूमिका महत्वपूर्ण होगी, जो तकनीक को समझते हुए विद्यार्थियों में रचनात्मक और तार्किक सोच विकसित कर सकें।
कार्यशाला के विषयगत सत्रों में विशेषज्ञों ने शिक्षकों के साथ अपने अनुभव और विचार साझा किए।

एन.एच. गोयल वर्ल्ड स्कूल रायपुर में CBSE द्वारा आयोजित कम्प्यूटेशनल थिंकिंग और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस कार्यशाला
वरिष्ठ शिक्षाविद् आशुतोष त्रिपाठी ने कम्प्यूटेशनल थिंकिंग और शिक्षा के क्षेत्र में इसके व्यावहारिक उपयोग पर चर्चा की। उन्होंने बताया कि तार्किक एवं व्यवस्थित तरीके से समस्याओं को समझना और उनके समाधान तलाशना विद्यार्थियों के सीखने की प्रक्रिया को बेहतर बना सकता है।
वहीं, दिल्ली से आए विशेषज्ञ विविध गुप्ता ने शिक्षण-अधिगम प्रक्रिया में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की संभावनाओं और उपयोगिता पर प्रकाश डाला। उन्होंने शिक्षा में AI के संभावित उपयोग और इसके माध्यम से शिक्षण प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाने के पहलुओं पर जानकारी दी।
परिचर्चा में AI के अवसर और चुनौतियों पर चर्चा
कार्यशाला के दौरान एक विशेष ज्ञानवर्धक परिचर्चा का भी आयोजन किया गया। इसमें वैशाली सेठ, इवान स्मिथ, डॉ. नीति सिंह यदुवंशी और चिरंजीवी मद्दाला ने शिक्षा में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के समावेश से जुड़ी संभावनाओं और चुनौतियों पर विचार साझा किए।
परिचर्चा का संचालन विनोद कुमार ने किया। विशेषज्ञों ने शिक्षा व्यवस्था में AI के बढ़ते प्रभाव, इसके प्रभावी उपयोग तथा शिक्षकों की बदलती भूमिका जैसे विषयों पर विचार-विमर्श किया।
CBSE अधिकारियों की रही गरिमामयी उपस्थिति
कार्यक्रम में जगदीश बर्मन, क्षेत्रीय अधिकारी एवं प्रमुख, उत्कृष्टता केंद्र, CBSE तथा डॉ. श्वेता सिंह, अकादमिक इकाई, CBSE मुख्यालय की गरिमामयी उपस्थिति रही।
कार्यशाला के दौरान शिक्षकों एवं अकादमिक नेतृत्वकर्ताओं को नवाचार, तकनीकी दक्षता और बदलती शैक्षणिक आवश्यकताओं के अनुरूप स्वयं को तैयार करने के लिए प्रोत्साहित किया गया।
भविष्य की शिक्षा के लिए उपयोगी पहल
कार्यशाला का समापन सकारात्मक एवं प्रेरणादायक वातावरण में हुआ। आयोजन ने शिक्षकों को नवाचारी, अनुकूलनशील और तकनीक-सक्षम बनने के लिए प्रेरित किया। साथ ही विद्यार्थियों को 21वीं सदी की बदलती आवश्यकताओं के अनुरूप तैयार करने में कम्प्यूटेशनल थिंकिंग और AI की भूमिका को रेखांकित किया गया।
कार्यशाला का संदेश स्पष्ट रहा कि सशक्त और तकनीक-सक्षम शिक्षक ही भविष्य की ऐसी कक्षाओं का निर्माण कर सकते हैं, जो विद्यार्थियों को बदलती दुनिया के लिए तैयार करें।
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