रायपुर। डायबिटीज यानी शुगर वर्तमान समय में तेजी से बढ़ती स्वास्थ्य समस्याओं में शामिल है। लंबे समय तक रक्त में शर्करा का स्तर अधिक रहने से शरीर के विभिन्न अंगों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, डायबिटीज के नियंत्रण के लिए संतुलित खान-पान, नियमित शारीरिक गतिविधि, पर्याप्त नींद और समय-समय पर स्वास्थ्य जांच को दिनचर्या का हिस्सा बनाना जरूरी है।

मेटाक्लक्स होम्योपैथी की ओर से जारी जानकारी के अनुसार, डायबिटीज से जुड़े मामलों में मरीजों को अलग-अलग प्रकार की स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। इनमें फैटी लिवर, गैस एवं पेट फूलना, फंगल इंफेक्शन, खुजली, चक्कर, संतुलन बिगड़ना, पेशाब संबंधी समस्याएं, कमजोरी और थकान जैसी शिकायतें शामिल हो सकती हैं।
पैरों में जलन और झुनझुनी जैसी शिकायतें भी हो सकती हैं
जानकारी के अनुसार, कुछ मरीजों में रक्त शर्करा की समस्या के साथ पैरों के तलवों में जलन, झुनझुनी और दर्द जैसी शिकायतें भी देखने को मिल सकती हैं। लंबे समय तक रक्त शर्करा का स्तर अनियंत्रित रहने पर हृदय सहित अन्य स्वास्थ्य संबंधी जटिलताओं का जोखिम बढ़ सकता है।
ऐसे में केवल लक्षणों के आधार पर उपचार करने के बजाय मरीज की स्वास्थ्य स्थिति की नियमित निगरानी और चिकित्सकीय जांच महत्वपूर्ण मानी जाती है।
समय पर स्वास्थ्य जांच और चिकित्सकीय सलाह जरूरी
संस्था की ओर से बताया गया कि डायबिटीज के साथ होने वाली विभिन्न स्वास्थ्य समस्याओं के लिए मरीजों को योग्य चिकित्सक से परामर्श लेना चाहिए। उपचार का निर्धारण मरीज की स्थिति, लक्षण, स्वास्थ्य इतिहास और आवश्यक चिकित्सकीय जांच के आधार पर किया जाना चाहिए।
प्रो. डॉ. ए.के. चौरेसिया एवं डॉ. एस. चौरेसिया द्वारा शुगर एवं उससे जुड़ी स्वास्थ्य समस्याओं के संबंध में मरीजों को परामर्श एवं मार्गदर्शन प्रदान किया जा रहा है।
खान-पान और दिनचर्या पर ध्यान देने की जरूरत
डायबिटीज से जूझ रहे लोगों के लिए खान-पान और दैनिक जीवनशैली पर ध्यान देना महत्वपूर्ण है। नियमित शारीरिक गतिविधि, संतुलित आहार, पर्याप्त नींद और चिकित्सक द्वारा सुझाई गई जांच एवं दवाओं का पालन स्वास्थ्य प्रबंधन में मददगार हो सकता है।
विशेषज्ञों के अनुसार, डायबिटीज के लक्षणों या स्वास्थ्य में किसी भी तरह के असामान्य बदलाव को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। समय पर चिकित्सकीय सलाह और नियमित स्वास्थ्य जांच से संभावित जटिलताओं की पहचान और प्रबंधन में मदद मिल सकती है।
संस्था की ओर से लोगों से अपील की गई है कि वे शुगर से संबंधित लक्षणों को गंभीरता से लें और अपनी स्वास्थ्य स्थिति के अनुसार योग्य चिकित्सक से परामर्श प्राप्त करें।
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