Home » मुख्यमंत्री विष्णु देव साय गृहग्राम बगिया में बैलों के साथ हल चलाकर की बियासी
vishnu-dev-sai-farming-bagiya-jashpur-2026.jpg

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय गृहग्राम बगिया में बैलों के साथ हल चलाकर की बियासी

अपनी माटी और खेती-किसानी से मुख्यमंत्री विष्णु देव साय का आत्मीय जुड़ाव गृहग्राम बगिया में सुबह-सुबह खेत पहुंचे मुख्यमंत्री, बैलों के साथ हल चलाकर की बियासी

by bholuchand news

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय का अपनी माटी और खेती-किसानी से गहरा जुड़ाव एक बार फिर देखने को मिला। मुख्यमंत्री आज सुबह जशपुर जिले के अपने गृहग्राम बगिया में खेत पहुंचे और पारंपरिक तरीके से बैलों की जोड़ी के साथ हल चलाकर बियासी की। खेत में उतरकर हल की मूठ थामे मुख्यमंत्री सहज ही एक किसान की भूमिका में नजर आए। इस दौरान उन्होंने खेती-किसानी से जुड़ी अपनी पुरानी स्मृतियों को भी साझा किया।

हरे-भरे खेतों के बीच मिट्टी की सौंधी खुशबू और बैलों के साथ खेती करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि अपने गांव, अपनी माटी और अपने खेत से जुड़ाव का सुख अलग ही होता है। हल की मूठ थामते ही खेती-किसानी से जुड़ी पुरानी यादें एक बार फिर जीवंत हो उठती हैं। खेतों के बीच बिताया समय मन को सुकून देने के साथ नई ऊर्जा भी प्रदान करता है।

vishnu-dev-sai-farming-bagiya-jashpur-2026.jpg

गृहग्राम बगिया में बैलों के साथ हल चलाते मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

खेती केवल आजीविका नहीं, जीवन का संस्कार

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि वे किसान परिवार से आते हैं और बचपन से ही खेती-किसानी को करीब से देखा और अनुभव किया है। उनके लिए खेती केवल आजीविका का साधन नहीं, बल्कि जीवन का संस्कार है।

उन्होंने कहा कि गांव और खेतों ने उन्हें श्रम का सम्मान करना, प्रकृति के साथ सामंजस्य बनाकर चलना और अपनी जड़ों से जुड़े रहना सिखाया है। यही अनुभव उनके जीवन और सार्वजनिक कार्यों में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

छत्तीसगढ़ की पहचान माटी और अन्नदाता किसानों से

मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ की पहचान यहां की माटी, मेहनतकश किसानों और समृद्ध कृषि परंपराओं से जुड़ी हुई है। प्रदेश की अर्थव्यवस्था के साथ-साथ सामाजिक और सांस्कृतिक जीवन में भी खेती-किसानी का महत्वपूर्ण स्थान है।

पीढ़ियों से प्रदेश के किसान अपने परिश्रम से धरती को सींचकर छत्तीसगढ़ की समृद्धि की नींव मजबूत करते आए हैं। प्रदेश के अनेक तीज-त्योहार, परंपराएं और ग्रामीण जीवन भी कृषि से गहराई से जुड़े हुए हैं।

उन्होंने कहा कि आधुनिकता के दौर में भी अपनी परंपराओं और जड़ों से जुड़े रहना बेहद जरूरी है। खेती हमें परिश्रम, धैर्य और प्रकृति के प्रति संवेदनशीलता का संदेश देती है।

किसान केवल फसल नहीं, समाज की समृद्धि उगाता है

मुख्यमंत्री ने कहा कि किसान अपने खेत में केवल फसल नहीं उगाता, बल्कि अपने श्रम के माध्यम से पूरे समाज के जीवन और प्रदेश की अर्थव्यवस्था को मजबूती देता है। किसानों की मेहनत से ही अन्न की उपलब्धता सुनिश्चित होती है और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को गति मिलती है।

उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ की माटी, समृद्ध कृषि परंपरा और मेहनतकश अन्नदाता किसान सदैव उनके हृदय के सबसे करीब हैं। किसानों की खुशहाली और कृषि की समृद्धि ही प्रदेश की समृद्धि का मजबूत आधार है।

मुख्यमंत्री ने प्रदेश के सभी अन्नदाता किसानों के परिश्रम को नमन करते हुए उनके जीवन में खुशहाली और खेतों में भरपूर फसल की कामना की।

खेती से मुख्यमंत्री का रहा है पुराना नाता

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय का जीवन ग्रामीण परिवेश और खेती-किसानी से गहराई से जुड़ा रहा है। सार्वजनिक जीवन की व्यस्तताओं के बीच जब भी उन्हें अवसर मिलता है, वे अपने गांव, खेत और ग्रामीण परिवेश से जुड़कर आत्मीयता का अनुभव करते हैं।

गृहग्राम बगिया के खेत में बैलों के साथ हल चलाते मुख्यमंत्री की सहजता में अपनी माटी और कृषि परंपरा के प्रति उनका गहरा लगाव साफ दिखाई दिया। खेत में पारंपरिक तरीके से बियासी करते हुए उन्होंने ग्रामीण जीवन और खेती से अपने पुराने रिश्ते को भी याद किया।

मुख्यमंत्री का खेत में उतरकर हल चलाना न केवल उनकी किसान पृष्ठभूमि से जुड़ी स्मृतियों को सामने लाता है, बल्कि प्रदेश की कृषि संस्कृति और अन्नदाता किसानों के प्रति उनके जुड़ाव को भी दर्शाता है।

You may also like