सुशासन की दिशा में आगे बढ़ रहे छत्तीसगढ़ में राजस्व प्रशासन को डिजिटल तकनीक से जोड़ने की पहल ने आम नागरिकों के लिए सरकारी सेवाओं को पहले की तुलना में अधिक सरल, पारदर्शी और सुलभ बनाया है। जमीन-जायदाद से जुड़े दस्तावेजों को दुरुस्त कराने, नामांतरण कराने, खसरा-नक्शा प्राप्त करने या भूमि संबंधी मामलों की जानकारी के लिए सरकारी कार्यालयों के बार-बार चक्कर लगाने की पुरानी व्यवस्था अब तेजी से बदल रही है।
आधुनिक तकनीक के उपयोग से राजस्व सेवाओं का डिजिटल रूपांतरण होने के साथ नागरिकों को घर बैठे कई महत्वपूर्ण सेवाओं और दस्तावेजों तक पहुंच मिल रही है। इससे न केवल समय और धन की बचत हो रही है, बल्कि राजस्व प्रशासन में पारदर्शिता और जवाबदेही भी मजबूत हो रही है।
19 हजार 723 गांवों के भू-नक्शों का पूर्ण कंप्यूटरीकरण
छत्तीसगढ़ में भुईयां और भू-नक्शा डिजिटल पहल के तहत प्रदेश के 20 हजार 298 गांवों के खसरा और 19 हजार 723 गांवों के भू-नक्शों का पूर्णतः कंप्यूटरीकरण किया जा चुका है।
डिजिटल भू-अभिलेखों के माध्यम से नागरिकों को शुद्ध एवं प्रमाणित भूमि संबंधी जानकारी आसानी से उपलब्ध हो रही है। इससे पुराने कागजी अभिलेखों पर निर्भरता कम हुई है।
वहीं डिजिटल इंडिया लैंड रिकॉर्ड मॉडर्नाइजेशन प्रोग्राम (DILRMP) के तहत राज्य की स्वीकृत 172 तहसीलों में से 158 तहसीलों में मॉडर्न रिकॉर्ड रूम का निर्माण पूरा हो चुका है। भू-अभिलेखों के डिजिटल एवं सुरक्षित संधारण से दस्तावेजों के फटने, खराब होने या गुम होने जैसी समस्याओं से भी राहत मिली है।
पक्षकारों के मोबाइल पर SMS से मिल रही सुनवाई की जानकारी
भूमि संबंधी विवादों के निपटारे में तेजी और पारदर्शिता लाने के उद्देश्य से ई-कोर्ट व्यवस्था को लागू किया गया है। इसके माध्यम से नागरिक भूमि संबंधी मामलों के लिए ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं और आवेदन से लेकर अंतिम निर्णय तक की जानकारी ऑनलाइन प्राप्त कर सकते हैं।
इस व्यवस्था की खास बात यह है कि सुनवाई की अगली तारीख की सूचना भी संबंधित पक्षकारों को उनके मोबाइल फोन पर SMS के माध्यम से भेजी जाती है। इससे तारीख की जानकारी के लिए कार्यालयों में व्यक्तिगत रूप से पहुंचने की आवश्यकता कम हुई है।
वर्ष 2025 से ‘ऑटो नामांतरण’ व्यवस्था
राजस्व प्रशासन में तकनीक के उपयोग का एक महत्वपूर्ण उदाहरण ऑटो नामांतरण (Auto Mutation) व्यवस्था है। राज्य के सभी 105 उप-पंजीयक कार्यालय भुईयां पोर्टल से सीधे जुड़े हुए हैं।
वर्ष 2025 से लागू ऑटो नामांतरण व्यवस्था के तहत जमीन की रजिस्ट्री होते ही खरीदार के नाम पर नामांतरण की प्रक्रिया स्वतः शुरू हो जाती है। एनआईसी (NIC) द्वारा विकसित इस व्यवस्था से पारंपरिक ऑफलाइन नामांतरण प्रक्रिया में लगने वाले समय को कम करने और नागरिकों की परेशानी घटाने में मदद मिली है।
‘ऑटो व्यपवर्तन’ से भूमि उपयोग परिवर्तन की प्रक्रिया आसान
भूमि उपयोग परिवर्तन की प्रक्रिया को भी तकनीक आधारित ऑटो व्यपवर्तन (Auto Diversion) व्यवस्था से सरल बनाया गया है। इसके तहत आवेदन प्राप्त होने के बाद निर्धारित प्रक्रिया को अधिक सुव्यवस्थित तरीके से पूरा किया जाता है और 15 दिनों के भीतर प्रक्रिया पूर्ण करने का प्रावधान है।
इसके साथ ही गाइडलाइन दरों और प्रीमियम दरों के निर्धारण की प्रक्रिया को भी स्वचालित प्रणाली से जोड़ा गया है। इससे प्रक्रिया में मानवीय हस्तक्षेप कम होने के साथ पारदर्शिता बढ़ाने में मदद मिल रही है।
किसानों को डिजिटल किसान ऋण पुस्तिका की सुविधा
किसानों के हित में राजस्व विभाग की डिजिटल पहल के तहत भुईयां पोर्टल पर डिजिटल किसान ऋण पुस्तिका उपलब्ध कराई जा रही है।
पटवारी और उप-पंजीयक के डिजिटल हस्ताक्षर से युक्त यह प्रमाणित दस्तावेज सिस्टम के माध्यम से तैयार होता है। इससे किसानों को महत्वपूर्ण भूमि दस्तावेजों के लिए बार-बार कार्यालयों के चक्कर लगाने की आवश्यकता कम होगी।
आगामी समय में इस व्यवस्था को सिविल न्यायालयों से भी जोड़े जाने की दिशा में कार्य किया जा रहा है। इससे भूमि से संबंधित न्यायालयीन स्थगन या आदेश की अद्यतन जानकारी भी अधिक पारदर्शी तरीके से उपलब्ध हो सकेगी।
खसरा और बी-1 दस्तावेज अब डिजिटल माध्यम से सुलभ
डिजिटल राजस्व सेवाओं को आम नागरिकों तक आसानी से पहुंचाने के लिए खसरा और बी-1 जैसे महत्वपूर्ण दस्तावेज WhatsApp Chatbot के माध्यम से भी उपलब्ध कराने की व्यवस्था की जा रही है।
इससे नागरिक अपने मोबाइल फोन के माध्यम से आवश्यक राजस्व दस्तावेजों तक आसानी से पहुंच सकेंगे। डिजिटल माध्यमों के विस्तार से विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों के नागरिकों के लिए राजस्व सेवाओं की पहुंच और आसान होने की उम्मीद है।
तकनीक से मजबूत हो रहा सुशासन
छत्तीसगढ़ में राजस्व प्रशासन का डिजिटल रूपांतरण केवल सरकारी प्रक्रियाओं को ऑनलाइन करने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह नागरिकों को अधिक सुविधाजनक, पारदर्शी और समयबद्ध सेवाएं उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
भू-अभिलेखों के कंप्यूटरीकरण, ऑटो नामांतरण, ऑटो व्यपवर्तन, ई-कोर्ट, डिजिटल किसान ऋण पुस्तिका और WhatsApp Chatbot जैसी व्यवस्थाओं ने राजस्व प्रशासन को तकनीक आधारित बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
इन पहलों से आम नागरिकों के समय और धन की बचत के साथ-साथ सरकारी प्रक्रियाओं में पारदर्शिता और जवाबदेही को भी मजबूती मिल रही है। आने वाले समय में डिजिटल तकनीक का विस्तार राजस्व सेवाओं को और अधिक सरल एवं नागरिक केंद्रित बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
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