महाराष्ट्र की राजनीति में ‘प्रशासन के मास्टर’ और ‘दादा’ के नाम से प्रसिद्ध उपमुख्यमंत्री अजित पवार का आज बुधवार, 28 जनवरी 2026 की सुबह एक दर्दनाक विमान हादसे में निधन हो गया। बारामती एयरपोर्ट पर लैंडिंग के दौरान उनके चार्टर्ड विमान में तकनीकी खराबी आ गई, जिससे विमान क्रैश हो गया। इस हादसे में अजित पवार समेत 5 लोगों की जान चली गई। 66 वर्षीय पवार न केवल एक कुशल राजनेता थे, बल्कि बारामती के विकास का प्रतीक भी माने जाते थे। उनके आकस्मिक निधन से पूरे महाराष्ट्र और देश में शोक की लहर फैल गई है।
राजनीतिक सफर और चुनावी रिकॉर्ड
पहला चुनाव (1991): अजित पवार ने 1991 में बारामती लोकसभा सीट से अपना राजनीतिक सफर शुरू किया और जीत हासिल की। इसके बाद शरद पवार के केंद्र में रक्षा मंत्री बनने पर उन्होंने सीट खाली कर राज्य की राजनीति में लौट आए।
विधानसभा का रिकॉर्ड (1991-2026): वे 1991 के उपचुनाव में बारामती से पहली बार विधायक बने। इसके बाद 1995, 1999, 2004, 2009, 2014, 2019 और नवंबर 2024 में आठवीं बार उन्होंने बारामती सीट पर जीत दर्ज की। 2024 में उन्होंने अपने भतीजे युगेंद्र पवार को 1 लाख से अधिक वोटों के अंतर से हराया।
प्रमुख पद: अजित पवार महाराष्ट्र के सबसे लंबे समय तक उपमुख्यमंत्री रहे और सिंचाई, जल संसाधन, बिजली, योजना और वित्त जैसे महत्वपूर्ण विभागों का प्रबंधन किया। वे 2022-23 में विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष भी रह चुके हैं।
पारिवारिक पृष्ठभूमि और राजनीति
पत्नी: अजित पवार का विवाह 1985 में सुनेत्रा पवार से हुआ। सुनेत्रा केवल गृहिणी नहीं, बल्कि महाराष्ट्र की एक शक्तिशाली राजनीतिक परिवार से आती हैं। वे वर्तमान में राज्यसभा सांसद हैं।
बेटे:
पार्थ पवार: राजनीति में सक्रिय, 2019 में मावल लोकसभा सीट से चुनाव लड़ा था।
जय पवार: परिवार के बिजनेस और कृषि कार्य संभालते हैं, बारामती चुनाव प्रबंधन में भी शामिल।
ससुराल पक्ष: सुनेत्रा पवार, महाराष्ट्र के पूर्व गृह मंत्री पदमसिंह पाटिल की बहन हैं, जो शरद पवार के करीबी सहयोगी रहे।
प्रशासन का मास्टर और बारामती का ‘दादा’
अजित पवार को महाराष्ट्र में ‘प्रशासन का मास्टर’ कहा जाता था। वे सुबह 6 बजे से काम शुरू करते और अधिकारियों पर उनकी पकड़ अद्वितीय थी। 2023 में उन्होंने एनसीपी (अजित गुट) बनाया और बीजेपी-शिवसेना गठबंधन में शामिल हुए। चुनाव आयोग ने उनके गुट को ‘असली एनसीपी’ और ‘घड़ी’ चुनाव चिन्ह प्रदान किया। अजित पवार अंधविश्वास या ज्योतिष में विश्वास नहीं करते थे। न अंगूठी, न कलावा, न किसी ज्योतिषी की सलाह – वे केवल मेहनत और काबिलियत में विश्वास रखते थे।
फिल्मी पृष्ठभूमि और खेल के प्रति दीवानगी
उनके पिता अनंतराव पवार फिल्म जगत से जुड़े थे और ‘राजकमल स्टूडियो’ में काम करते थे। अगर पिता का आकस्मिक निधन नहीं होता तो शायद अजित पवार फिल्म निर्देशन या निर्माण में नाम कमा रहे होते। खेलों के प्रति भी उनकी गहरी रुचि थी। खो-खो, कबड्डी और क्रिकेट में वे सक्रिय खिलाड़ी रहे और उन्होंने शिवाजी विश्वविद्यालय, कोल्हापुर में खेल प्रतियोगिताओं में भाग लिया।
कड़ी मेहनत और समाज सेवा
अजित पवार रोजाना 16-17 घंटे काम करते थे और उनका नियम था: “कोई फाइल अगले दिन के लिए पेंडिंग न रहे”। उन्होंने बारामती में ‘विद्या प्रतिष्ठान’ जैसे शिक्षण संस्थान विकसित किए और गरीब छात्रों की फीस निजी तौर पर चुकाते थे।
विरासत और अंतिम विदाई
अजित पवार ने बारामती और महाराष्ट्र के विकास में ऐतिहासिक योगदान दिया। उनके निधन के बाद उनकी पत्नी सुनेत्रा पवार और बेटा पार्थ पवार इस विशाल राजनीतिक और सामाजिक विरासत को संभालने की जिम्मेदारी लेंगे।

