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मोस्ट वांटेड नक्सली माडवी हिडमा ढेर

देश का मोस्ट वांटेड नक्सली माडवी हिडमा ढेर: कैसे बना एक आदिवासी युवक से खूंखार माओवादी, खूनी सफर की पूरी दास्तान…

by Desk 1

बीजापुर–आंध्र प्रदेश की सीमा पर सोमवार तड़के हुई बड़ी मुठभेड़ में देश का सबसे मोस्ट वांटेड नक्सली कमांडर माडवी हिड़मा और उसकी पत्नी राजे उर्फ राजक्का समेत छह नक्सली ढेर हो गए। यह कार्रवाई आंध्र प्रदेश के अल्लूरी सीताराम राजू (ASR) जिले के मारेदुमिल्ली क्षेत्र में हुई, जहाँ सुरक्षा बलों ने सुबह 6 से 7 बजे के बीच नक्सलियों के एक बड़े समूह को घेरते हुए मुठभेड़ में मार गिराया। मारे गए नक्सलियों में लकमल, कमलू, मल्ला और देवे भी शामिल है, जो हिड़मा का निजी गार्ड था। ऑपरेशन के दौरान सुरक्षा बलों ने दो AK-47, एक रिवॉल्वर और एक पिस्तौल भी बरामद की।

16 साल की उम्र में नक्सली संगठन से जुड़ा हिड़मा:

44 वर्षीय हिड़मा पर 50 लाख रुपये का इनाम था और वह पिछले दो दशकों से देश के सबसे खतरनाक नक्सली चेहरों में गिना जाता रहा। वह पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी (PGLA) बटालियन–1 का प्रमुख था और CPI (माओवादी) की केंद्रीय समिति का सबसे युवा सदस्य। सुकमा जिले के पुवार्ती में जन्मा हिड़मा 16 साल की उम्र में नक्सली संगठन से जुड़ा और जल्दी ही नक्सलियों की टॉप रैंकिंग में पहुँच गया। उसकी फुर्ती, जंगल ज्ञान और ठंडे दिमाग से बनाई गई हमले की प्लानिंग ने उसे नक्सल संगठन का सबसे रणनीतिक और खूंखार चेहरा बना दिया था।

30 से अधिक बड़े नक्सली हमलों में रहा शामिल:

हिड़मा 2004 से अब तक 30 से अधिक बड़े नक्सली हमलों में शामिल रहा। इनमें 2013 का झीरम घाटी नरसंहार शामिल है, जिसमें नंदकुमार पटेल, महेंद्र कर्मा और पूर्व केंद्रीय मंत्री विद्याचरण शुक्ल जैसे बड़े नेताओं की हत्या की गई। 2017 में सुकमा के बुर्कापाल में 24 CRPF जवानों के शहीद होने वाला हमला भी उसी के नेतृत्व में हुआ था। इसके अलावा 2010 के ताड़मेटला और 2021 के बीजापुर हमलों में भी उसकी केंद्रीय भूमिका थी। माना जाता है कि हिड़मा 150 से अधिक जवानों और नेताओं की हत्या का जिम्मेदार था।

चार लेयर की सुरक्षा में चलता था हिड़मा:

हिड़मा की सुरक्षा इतनी मजबूत थी कि वह हमेशा चार लेयर की सुरक्षा में चलता था। 200 से 250 नक्सली 24 घंटे उसकी सुरक्षा में लगे रहते थे। उसकी दिनचर्या बेहद अनुशासित थी—सुबह 4 बजे उठना, PT कराना, दिनभर रणनीति बनाना और रात में किताबें पढ़ना उसकी आदतों में शामिल था। शुगर की बीमारी के कारण वह खाने में सावधान रहता था, लेकिन उसे बीफ का खास शौक था।

हिड़मा और उसकी टीम के ढेर होने को सुरक्षा एजेंसियां नक्सल संगठन पर अब तक का सबसे बड़ा झटका मान रही हैं। सीमा क्षेत्र में अभी भी कॉम्बिंग ऑपरेशन जारी है और और भी नक्सलियों के मारे जाने की संभावना जताई जा रही है।

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