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घृष्णेश्वर ज्योतिर्लिंग

घृष्णेश्वर ज्योतिर्लिंग: पुण्य, भक्ति और त्याग की धरती पर शिव का दिव्य वास, अंतिम ज्योतिर्लिंग

by Desk 1

भारत के 12 ज्योतिर्लिंगों में अंतिम यानी बारहवां ज्योतिर्लिंग है ‘घृष्णेश्वर’, जो महाराष्ट्र के औरंगाबाद जिले में दोलताबाद से करीब 12 किलोमीटर दूर स्थित है। यह स्थान न केवल शिवभक्तों के लिए विशेष महत्व रखता है, बल्कि इतिहास और वास्तुकला के प्रेमियों के लिए भी एक दर्शनीय स्थल है, क्योंकि इसके आसपास एलोरा और अजंता की प्रसिद्ध गुफाएं भी मौजूद हैं।

घृष्णेश्वर मंदिर का धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व

शिव पुराण में उल्लेख है कि घृष्णेश्वर ज्योतिर्लिंग के दर्शन मात्र से ही भक्त को पापों से मुक्ति मिल जाती है। इस मंदिर की शयन आरती विशेष रूप से पूजनीय मानी जाती है। यहां आने वाले श्रद्धालु 101 शिवलिंगों की पूजा और 101 परिक्रमाएं करते हैं।

मंदिर के पास ही एक पवित्र सरोवर स्थित है, जहां भक्त स्नान कर पुण्य अर्जित करते हैं। इसके अलावा, यहां स्थित लक्ष्य विनायक मंदिर भी अत्यंत महत्वपूर्ण है, जिसे 21 गणेश पीठों में एक माना जाता है।

घृष्णेश्वर ज्योतिर्लिंग की पौराणिक कथा

पुराणों के अनुसार, इस क्षेत्र में ब्राह्मण सुधर्मा और उसकी पत्नी सुदेहा रहते थे। संतान न होने के कारण सुदेहा ने अपनी बहन घुश्मा का विवाह सुधर्मा से करवा दिया। घुश्मा शिव जी की परम भक्त थीं। उन्होंने नियमित रूप से 101 शिवलिंग बनाकर पूजा की और उनका व्रत रखा। शीघ्र ही उनके यहां एक पुत्र का जन्म हुआ।

लेकिन सुदेहा, जो पहले घुश्मा के सुख में सहभागी थी, अब ईर्ष्या से ग्रसित हो गईं। उन्होंने एक रात घुश्मा के पुत्र की हत्या कर शव को पास के कुंड में फेंक दिया।

घृष्णेश्वर ज्योतिर्लिंग

घृष्णेश्वर ज्योतिर्लिंग

जब घुश्मा को यह समाचार मिला, उन्होंने शांति बनाए रखी और शिव पूजा जारी रखी। उनकी भक्ति से प्रसन्न होकर शिव जी प्रकट हुए और मृत पुत्र को जीवित कर दिया। इसके बाद, घुश्मा ने शिव जी से प्रार्थना की कि वे यहीं विराजमान हो जाएं। शिव जी ने भक्त की प्रार्थना स्वीकार करते हुए यहां ज्योति रूप में वास किया, और इस ज्योतिर्लिंग को घुश्मा के नाम पर ‘घृष्णेश्वर’ कहा गया।

वास्तुकला और पुनर्निर्माण

यह मंदिर कई बार मुगल और मराठा युद्धों में नष्ट हुआ, लेकिन इंदौर की रानी अहल्याबाई होलकर ने 18वीं शताब्दी में इसका भव्य पुनर्निर्माण करवाया। मंदिर की वास्तुकला में दक्षिण भारतीय शैली का प्रभाव स्पष्ट दिखाई देता है।

घृष्णेश्वर ज्योतिर्लिंग तक कैसे पहुंचे?

निकटतम शहर: औरंगाबाद

हवाई अड्डा: औरंगाबाद एयरपोर्ट

रेल/सड़क मार्ग: देश के प्रमुख शहरों से सीधा संपर्क

घृष्णेश्वर मंदिर की दूरी: औरंगाबाद से टैक्सी/बस द्वारा 30-40 किमी में आसानी से पहुँचा जा सकता है।

पास ही स्थित हैं एलोरा और अजंता की गुफाएं, जिन्हें देखना भी एक अविस्मरणीय अनुभव है।

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