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क्यों मनाई जाती है शरद पूर्णिमा, क्या हैं इस पर्व की मान्यताएं

by bholuchand news

आज शरद पूर्णिमा मनाई जा रही है ऐसा माना जाता है कि शरद पूर्णिमा के अवसर पर चंद्रमा की किरणों से अमृत की वर्षा होती है, जिसे अमृत काल के नाम से जाना जाता है। इसलिए इस पर्व की रात को चंद्रमा के प्रकाश में खीर रखी जाती है और अगले दिन इसे खाया जाता है। इस बीच चलिए जानते हैं चंद्रमा की विशेषताएं अद्वितीय और विशेष धार्मिक और वैज्ञानिक महत्व रखती हैं:

1. सोलह कलाओं से पूर्ण:

शरद पूर्णिमा के दिन चंद्रमा अपनी सोलह कलाओं के साथ उदित होता है। इसे चंद्रमा की पूर्णता का दिन माना जाता है। सोलह कलाओं का मतलब है कि इस दिन चंद्रमा की सारी शक्तियां अपने चरम पर होती हैं। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान श्रीकृष्ण भी सोलह कलाओं के अवतार माने जाते हैं, इसलिए इस दिन का विशेष महत्व है।

2. अमृत की वर्षा:

शरद पूर्णिमा की रात को चंद्रमा की किरणों में अमृत तत्व होने की मान्यता है। ऐसा माना जाता है कि चंद्रमा अपनी किरणों से पृथ्वी पर अमृत की वर्षा करता है, जो स्वास्थ्य और शारीरिक शुद्धता के लिए लाभकारी होता है। इसलिए, इस रात को लोग खुले आसमान के नीचे खीर और दूध रखकर, उन पर चंद्रमा की किरणों का प्रभाव लेते हैं और उसे प्रसाद के रूप में ग्रहण करते हैं।

3. शीतलता और शांति:

शरद पूर्णिमा के दिन चंद्रमा की किरणें अत्यंत शीतल और शांतिपूर्ण होती हैं। यह रात सबसे अधिक चमकदार और शांतिमय मानी जाती है। इसे मानसिक शांति और शारीरिक ऊर्जा प्राप्त करने का उत्तम समय माना जाता है। चंद्रमा की शीतलता से मन को भी शांति मिलती है।

4. शरद ऋतु का स्वागत:

शरद पूर्णिमा के दिन चंद्रमा की स्थिति यह संकेत देती है कि शरद ऋतु का आगमन हो चुका है। यह समय गर्मी के अंत और ठंड के प्रारंभ का प्रतीक है। चंद्रमा की किरणें वातावरण को ठंडक और शीतलता प्रदान करती हैं।

5. धार्मिक महत्व:

इस दिन चंद्रमा का विशेष पूजन किया जाता है। चंद्रमा को सुख, समृद्धि, और शांत जीवन का प्रतीक माना जाता है। इस दिन की गई चंद्रमा पूजा से जीवन में सकारात्मक ऊर्जा और मानसिक शांति प्राप्त होती है।

इन विशेषताओं के कारण शरद पूर्णिमा का दिन चंद्रमा की पूजा और आध्यात्मिक साधना के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है।

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