रायपुर, 23 अक्टूबर 2026। छत्तीसगढ़ में लंबे समय से खाली पड़े सरकारी आवासों के बेहतर उपयोग और आवासीय योजनाओं में बसाहट बढ़ाने के लिए राज्य सरकार की बल्क परचेस नीति के सकारात्मक परिणाम सामने आने लगे हैं। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में लिए गए निर्णय के बाद छत्तीसगढ़ गृह निर्माण एवं अधोसंरचना विकास मंडल के आवासों की संस्थागत खरीदी को गति मिली है। अब तक दुर्ग, जगदलपुर, बिलासपुर, रायगढ़, नवा रायपुर अटल नगर और आरंग में कुल 226 आवासों का विक्रय किया गया है। इनका कुल मूल्य लगभग 42.17 करोड़ रुपये बताया गया है।
वित्त एवं आवास एवं पर्यावरण मंत्री श्री ओ.पी. चौधरी के मार्गदर्शन में मंडल द्वारा लंबे समय से रिक्त आवासों के विक्रय, उपलब्ध संपत्तियों के बेहतर उपयोग और आवासीय परिसरों में बसाहट बढ़ाने के प्रयास किए जा रहे हैं। बल्क परचेस व्यवस्था के तहत शासकीय, अर्द्धशासकीय और निजी संस्थाएं अपने कर्मचारियों की आवासीय जरूरतों को पूरा करने के लिए एक साथ कई मकान खरीद सकती हैं।
सरकार की इस पहल से खाली भवनों के उपयोग को बढ़ावा मिलने के साथ मंडल को राजस्व प्राप्त होने और आवासीय परिसरों के रखरखाव में सहायता मिलने की उम्मीद है।
छह शहरों में 226 आवासों की खरीदी
छत्तीसगढ़ गृह निर्माण एवं अधोसंरचना विकास मंडल के अनुसार, विभिन्न संस्थाओं ने अब तक छह शहरों में 226 आवास खरीदे हैं। इनकी कुल कीमत लगभग 42.17 करोड़ रुपये है।
जीएसटी विभाग ने प्रदेश के चार शहरों में कुल 68 आवास खरीदे हैं। इनकी कीमत लगभग 23.77 करोड़ रुपये है। शहरवार विवरण इस प्रकार है:
- दुर्ग: 24 मकान, लगभग 6.50 करोड़ रुपये।
- जगदलपुर: 16 मकान, लगभग 6 करोड़ रुपये।
- बिलासपुर: 25 मकान, लगभग 10.35 करोड़ रुपये।
- रायगढ़: 3 मकान, लगभग 92 लाख रुपये।
इसी तरह नवा रायपुर अटल नगर में प्रधानमंत्री सह-मुख्यमंत्री आवास योजना के अंतर्गत मेफेयर संस्था ने 128 मकान लगभग 16.20 करोड़ रुपये में खरीदे हैं। वहीं, मैट्स विश्वविद्यालय ने आरंग में 30 मकान लगभग 2.20 करोड़ रुपये में खरीदे हैं।
इन संस्थागत खरीदारियों से मंडल की आवासीय योजनाओं में लंबे समय से खाली पड़े भवनों के उपयोग को बढ़ावा मिल रहा है।
नवा रायपुर में 128 फ्लैट खरीदने का भी निर्णय
नवा रायपुर अटल नगर में विज्ञान एवं आयुष विश्वविद्यालय ने भी 128 फ्लैटों की बल्क खरीदी का निर्णय लिया है। इनकी अनुमानित कीमत लगभग 16.20 करोड़ रुपये बताई गई है। यह खरीदी प्रस्तावित है और इसके पूरा होने पर संस्थागत आवास विक्रय का आंकड़ा और बढ़ेगा।
इस तरह संस्थाओं की बढ़ती रुचि से कर्मचारियों के लिए आवास उपलब्ध कराने और रिक्त सरकारी संपत्तियों का उपयोग सुनिश्चित करने की दिशा में नई संभावनाएं बन रही हैं।
मंत्रिपरिषद के निर्णय से खुला रिक्त आवासों की बिक्री का रास्ता
छत्तीसगढ़ गृह निर्माण एवं अधोसंरचना विकास मंडल ने नवा रायपुर अटल नगर के सेक्टर-16, 30 और 34 में प्रधानमंत्री सह-मुख्यमंत्री आवास योजना के अंतर्गत आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) तथा निम्न आय वर्ग (LIG) के लिए बड़ी संख्या में आवास बनाए हैं। योजना के पहले चरण में कुल 6,296 भवनों का निर्माण किया गया था।
इन आवासों की बिक्री के लिए समय-समय पर विज्ञापन जारी किए गए, लेकिन इसके बावजूद कुछ मकान लंबे समय तक खाली रहे। इससे भवनों की सुरक्षा, रखरखाव और मंडल के वित्तीय संसाधनों के प्रबंधन से जुड़ी चुनौतियां सामने आ रही थीं।
इन परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय की अध्यक्षता में राज्य मंत्रिपरिषद ने 14 नवंबर 2025 को महत्वपूर्ण निर्णय लिया। इसके तहत तीन बार विज्ञापन जारी होने के बाद भी नहीं बिकने वाले आवासों को पात्र हितग्राहियों के अतिरिक्त अन्य आय वर्ग के व्यक्तियों और संस्थाओं को भी बेचने की अनुमति दी गई।
इस निर्णय का उद्देश्य रिक्त आवासों का उपयोग बढ़ाना और सरकारी संपत्तियों को लंबे समय तक खाली पड़े रहने से बचाना है।
EWS और LIG हितग्राहियों को अनुदान का लाभ जारी रहेगा
सरकार ने स्पष्ट किया है कि अन्य आय वर्ग के व्यक्तियों और संस्थाओं को आवास खरीदने पर सरकारी अनुदान का लाभ नहीं मिलेगा। वहीं, प्रधानमंत्री सह-मुख्यमंत्री आवास योजना के अंतर्गत पात्र EWS और LIG हितग्राहियों को निर्धारित केंद्रीय एवं राज्य शासन के अनुदान का लाभ पहले की तरह मिलता रहेगा।
इस व्यवस्था के माध्यम से पात्र हितग्राहियों के हितों की सुरक्षा के साथ उन आवासों का उपयोग बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है, जो कई बार विज्ञापन जारी होने के बाद भी नहीं बिक सके थे।
आवासीय योजनाओं की सफलता उनमें बसाहट से तय होती है: अनुराग सिंह देव
छत्तीसगढ़ गृह निर्माण एवं अधोसंरचना विकास मंडल के अध्यक्ष श्री अनुराग सिंह देव ने कहा कि मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य शासन का यह निर्णय दूरदर्शी सोच और जनहित का उदाहरण है। किसी भी आवासीय योजना की सफलता केवल मकानों के निर्माण से नहीं, बल्कि उनमें लोगों की बसाहट और उनके बेहतर उपयोग से सुनिश्चित होती है।
उन्होंने कहा कि लंबे समय तक खाली रहने वाले भवनों की सुरक्षा और रखरखाव पर अतिरिक्त संसाधन खर्च होते हैं। बल्क परचेस व्यवस्था से ऐसे आवासों का उपयोग बढ़ेगा और मंडल की वित्तीय स्थिति को भी मजबूती मिल सकती है।
श्री सिंह देव के अनुसार, इस सुविधा से शासकीय, अर्द्धशासकीय और निजी संस्थाओं को अपने कर्मचारियों के लिए एक ही परिसर में आवास उपलब्ध कराने का अवसर मिल रहा है। इससे कर्मचारियों को व्यवस्थित आवासीय वातावरण मिलने के साथ स्थानीय आर्थिक और व्यावसायिक गतिविधियों को भी प्रोत्साहन मिल सकता है।
पारदर्शी प्रक्रिया से हो रही आवासों की बिक्री
मंडल के आयुक्त श्री अवनीश कुमार शरण ने बताया कि शासन के निर्णय के बाद विभिन्न शासकीय और निजी संस्थाएं आवासीय योजनाओं में बल्क परचेस के प्रति रुचि दिखा रही हैं। जीएसटी विभाग के साथ मेफेयर और मैट्स विश्वविद्यालय जैसी संस्थाओं द्वारा आवास खरीदा जाना इस दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि है।
उन्होंने बताया कि नवा रायपुर में विज्ञान एवं आयुष विश्वविद्यालय द्वारा 128 फ्लैटों की बल्क खरीदी का निर्णय भी संस्थागत आवासीय मांग को दर्शाता है। मंडल द्वारा आवासों के विक्रय की प्रक्रिया निर्धारित नियमों के अनुसार ऑनलाइन ऑफर के माध्यम से संचालित की जा रही है। इसमें पारदर्शिता, निष्पक्षता और सभी को समान अवसर देने पर ध्यान दिया जा रहा है।
नई बसाहट से स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मिलेगा लाभ
राज्य सरकार की इस पहल से आवासीय परिसरों में नई बसाहट बढ़ने की उम्मीद है। जब कर्मचारी और उनके परिवार इन परिसरों में रहने लगेंगे, तो आसपास के बाजार, परिवहन, दैनिक जरूरतों की वस्तुओं और अन्य सेवाओं की मांग में भी वृद्धि हो सकती है।
नियमित बसाहट से भवनों की सुरक्षा और रखरखाव बेहतर बनाने तथा उपलब्ध नागरिक सुविधाओं का प्रभावी उपयोग करने में भी मदद मिल सकती है। इसके अलावा, संस्थागत खरीदी से मंडल को प्राप्त होने वाला राजस्व भविष्य की आवासीय योजनाओं और अधोसंरचना विकास गतिविधियों में सहायक हो सकता है।
प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के ‘सबके लिए आवास’ के विजन के अनुरूप राज्य सरकार आवासीय सुविधाओं के विस्तार और निर्मित भवनों के प्रभावी उपयोग की दिशा में काम कर रही है। बल्क परचेस नीति को इसी प्रयास की महत्वपूर्ण कड़ी माना जा रहा है, जिससे छत्तीसगढ़ में आवासीय विकास, संस्थागत सुविधाओं और व्यवस्थित शहरी बसाहट को गति मिलने की उम्मीद है।

