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अर्बन चैलेंज फंड से छत्तीसगढ़ के शहरों के विकास को मिलेगी नई गति: मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय

नगरीय निकाय भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार करें विकास परियोजनाएं, केंद्र के एक लाख करोड़ रुपये के अर्बन चैलेंज फंड से शहरों को आधुनिक और आत्मनिर्भर बनाने का मिलेगा अवसर

by bholuchand news

रायपुर, 21 अक्टूबर 2026। छत्तीसगढ़ के शहरों को सुनियोजित, आधुनिक और सुविधासंपन्न बनाने की दिशा में राज्य सरकार ने नगरीय विकास योजनाओं को नई गति देने पर जोर दिया है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि विकसित भारत और विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण में शहरों की महत्वपूर्ण भूमिका होगी। इसलिए नगरीय निकायों को वर्तमान जरूरतों के साथ आने वाले दशकों की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए विकास परियोजनाएं तैयार करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि अर्बन चैलेंज फंड के माध्यम से प्रदेश के शहरों को बेहतर बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने और उनकी आर्थिक क्षमता मजबूत करने का अवसर मिलेगा।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने बुधवार को नवा रायपुर स्थित मेफेयर लेक रिजॉर्ट में आवास एवं शहरी विकास निगम (हुडको) और छत्तीसगढ़ शासन के नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित अर्बन चैलेंज फंड (UCF) एवं अर्बन इन्वेस्ट विंडो (UiWIN) विषयक प्रथम क्षेत्रीय कार्यशाला का शुभारंभ किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि शहर केवल आवास और नागरिक सुविधाओं के केंद्र नहीं हैं, बल्कि उद्योग, व्यापार, रोजगार, निवेश और नवाचार के प्रमुख आधार भी हैं। ऐसे में शहरी विकास की योजनाएं सुनियोजित, समावेशी, टिकाऊ और आर्थिक रूप से व्यवहार्य होनी चाहिए।

नगरीय विकास के लिए दो महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर

कार्यशाला के दौरान छत्तीसगढ़ में नगरीय विकास को मजबूत करने के लिए दो महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापनों (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए। पहला समझौता हुडको और छत्तीसगढ़ शासन के नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के बीच हुआ, जबकि दूसरा समझौता नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग और सेप्ट विश्वविद्यालय के बीच संपन्न हुआ।

मुख्यमंत्री साय ने इन समझौतों को प्रदेश के शहरों के विकास की दिशा में महत्वपूर्ण पहल बताया। उन्होंने कहा कि इनके माध्यम से नगरीय निकायों को विकास परियोजनाओं की योजना तैयार करने, वित्तीय संसाधन जुटाने, तकनीकी विशेषज्ञता प्राप्त करने, प्रशिक्षण और संस्थागत क्षमता विकसित करने में सहयोग मिलेगा।

उन्होंने कहा कि शहरी विकास के लिए शासन, वित्तीय संस्थानों और विशेषज्ञ संस्थाओं के बीच बेहतर समन्वय आवश्यक है। इस तरह की साझेदारी से शहरों की वास्तविक जरूरतों के अनुरूप गुणवत्तापूर्ण परियोजनाएं तैयार करने और उन्हें प्रभावी ढंग से लागू करने में मदद मिलेगी।

विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण में शहरों की होगी अहम भूमिका

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वर्ष 2047 तक विकसित भारत के निर्माण का लक्ष्य निर्धारित किया है। इसी दिशा में छत्तीसगढ़ सरकार भी विकसित छत्तीसगढ़ के विजन को साकार करने के लिए मिशन मोड में काम कर रही है।

उन्होंने कहा कि प्रदेश में ऐसे शहरों का विकास जरूरी है, जो निवेश आकर्षित करें, उद्योग और व्यापार के लिए अनुकूल वातावरण तैयार करें तथा युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा करें। इसके साथ ही नागरिकों को बेहतर पेयजल, सड़क, बिजली, स्वच्छता, परिवहन और अन्य मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराना भी प्राथमिकता होनी चाहिए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सुनियोजित शहरीकरण विकसित छत्तीसगढ़ की मजबूत नींव बनेगा। इसलिए नगरीय निकायों को केवल तात्कालिक समस्याओं के समाधान तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखकर दीर्घकालिक योजनाएं तैयार करनी चाहिए।

जलभराव और अव्यवस्थित तारों की समस्या का हो स्थायी समाधान

मुख्यमंत्री साय ने शहरों में जलभराव की समस्या का उल्लेख करते हुए कहा कि बरसात के दौरान नागरिकों को होने वाली परेशानियों का स्थायी समाधान किया जाना चाहिए। इसके लिए आधुनिक और प्रभावी जल निकासी व्यवस्था विकसित करने की जरूरत है।

उन्होंने कहा कि पेयजल, सड़क, बिजली, जल निकासी और स्वच्छता जैसी सुविधाओं की योजना अलग-अलग बनाने के बजाय उन्हें समग्र शहरी नियोजन का हिस्सा बनाया जाना चाहिए। विभिन्न विभागों के बीच समन्वय से विकास कार्यों की गुणवत्ता बेहतर होगी और संसाधनों का भी उचित उपयोग किया जा सकेगा।

मुख्यमंत्री ने शहरों में बिजली और अन्य सेवाओं के अव्यवस्थित तारों की समस्या पर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि जहां तकनीकी रूप से संभव हो, वहां बिजली और अन्य सेवाओं के तारों को भूमिगत करने की योजनाएं बनाई जानी चाहिए। इससे शहरों की सुंदरता बढ़ाने के साथ नागरिक सुरक्षा और यातायात व्यवस्था को भी बेहतर बनाने में मदद मिलेगी।

जनप्रतिनिधि अपने शहरों के भविष्य की बनाएं योजना

मुख्यमंत्री ने कार्यशाला में शामिल महापौरों, नगर पालिका और नगर पंचायत अध्यक्षों तथा अधिकारियों से कहा कि जनता ने उन्हें अपने शहरों के विकास की जिम्मेदारी सौंपी है। इसलिए उन्हें अपने शहर की वास्तविक समस्याओं और आवश्यकताओं को समझकर स्थायी समाधान तलाशने चाहिए।

उन्होंने कहा कि अर्बन चैलेंज फंड नगरीय निकायों के लिए एक बड़ा अवसर है। सभी निकायों को इसके प्रावधानों का गंभीरता से अध्ययन करना चाहिए और विशेषज्ञों के मार्गदर्शन में ऐसी परियोजनाएं तैयार करनी चाहिए, जो तकनीकी रूप से मजबूत, नागरिकों के लिए उपयोगी और आर्थिक रूप से व्यवहार्य हों।

मुख्यमंत्री ने विश्वास जताया कि कार्यशाला से प्राप्त तकनीकी मार्गदर्शन और विशेषज्ञों के सुझाव प्रदेश के नगरीय विकास को नई दिशा देंगे। शासन, जनप्रतिनिधियों और विशेषज्ञ संस्थाओं के साझा प्रयासों से छत्तीसगढ़ के शहरों को स्वच्छ, सुंदर, सुव्यवस्थित और आत्मनिर्भर बनाया जा सकेगा।

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एक लाख करोड़ रुपये का अर्बन चैलेंज फंड शहरों के लिए बड़ा अवसर: अरुण साव

उप मुख्यमंत्री एवं नगरीय प्रशासन एवं विकास मंत्री अरुण साव ने कहा कि केंद्र सरकार ने अर्बन चैलेंज फंड के लिए एक लाख करोड़ रुपये का प्रावधान किया है। यह देश के शहरों के विकास के लिए बड़ा अवसर है। अब नगरीय निकायों के सामने चुनौती यह है कि वे कितनी गुणवत्तापूर्ण और व्यवहार्य परियोजनाएं तैयार कर इस फंड से अधिकतम संसाधन प्राप्त कर पाते हैं।

उन्होंने कहा कि तकनीक और नागरिकों की अपेक्षाएं तेजी से बदल रही हैं। ऐसे में नगरीय निकायों को अपनी कार्यशैली में बदलाव करते हुए आधुनिक तकनीक और नवाचार को अपनाना होगा।

उप मुख्यमंत्री ने कहा कि विकास परियोजनाओं की सफलता केवल निर्माण कार्य पूरा होने से तय नहीं होती। परियोजना की उपयोगिता, संचालन, रखरखाव और वित्तीय व्यवहार्यता की योजना भी शुरुआत से ही स्पष्ट होनी चाहिए। जनता के एक-एक रुपये का सदुपयोग सुनिश्चित करना सभी की जिम्मेदारी है।

उन्होंने जनप्रतिनिधियों से अपने कार्यकाल में ऐसे विकास कार्यों को प्राथमिकता देने की अपील की, जिनका लाभ आने वाली पीढ़ियों को भी मिल सके।

शहरों को वित्तीय रूप से मजबूत बनाने पर जोर: तोखन साहू

केंद्रीय आवासन एवं शहरी कार्य राज्य मंत्री तोखन साहू ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश में शहरी विकास को नई दिशा मिली है। प्रधानमंत्री आवास योजना-शहरी, स्वच्छ भारत मिशन और अमृत मिशन जैसी योजनाओं के माध्यम से नागरिक सुविधाओं का विस्तार हुआ है।

उन्होंने कहा कि तेजी से बढ़ते शहरीकरण के कारण आवास, पेयजल, सड़क, परिवहन और स्वच्छता जैसी सुविधाओं की मांग बढ़ रही है। इन आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए नगरीय निकायों को वित्तीय रूप से मजबूत और आत्मनिर्भर बनाना जरूरी है।

तोखन साहू ने कहा कि विकास परियोजनाएं नागरिकों के लिए उपयोगी होने के साथ आर्थिक रूप से व्यवहार्य भी होनी चाहिए। सरकारी सहायता के अलावा बैंक वित्तपोषण, बाजार आधारित संसाधनों और सार्वजनिक-निजी भागीदारी जैसे विकल्पों का भी प्रभावी उपयोग किया जाना चाहिए।

उन्होंने जबलपुर में कचरे से ऊर्जा उत्पादन तथा हैदराबाद में जल प्रबंधन और तकनीक आधारित निगरानी व्यवस्था जैसे उदाहरणों का उल्लेख करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ के नगरीय निकायों को देश के सफल प्रयोगों का अध्ययन कर स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप उन्हें अपनाना चाहिए।

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अंतिम व्यक्ति तक विकास पहुंचाने पर सरकार का जोर

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि केंद्र सरकार ‘सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास’ के मूल मंत्र के साथ समाज के अंतिम व्यक्ति तक विकास का लाभ पहुंचाने के लिए काम कर रही है।

उन्होंने पीएम जनमन योजना और धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान का उल्लेख करते हुए कहा कि इनके माध्यम से जनजातीय क्षेत्रों में सड़क, बिजली, आवास, पेयजल और अन्य बुनियादी सुविधाओं के विस्तार को गति मिली है।

मुख्यमंत्री ने छत्तीसगढ़ में रेल अधोसंरचना के विस्तार का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि रावघाट क्षेत्र तक रेल संपर्क के विस्तार और रायपुर से कुरुद तक रेल सेवा की शुरुआत प्रदेश के विकास की दृष्टि से महत्वपूर्ण उपलब्धियां हैं।

उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ प्राकृतिक और खनिज संपदा से समृद्ध प्रदेश है। यहां की उर्वर भूमि, प्रचुर संसाधन और मेहनती नागरिक प्रदेश की सबसे बड़ी ताकत हैं। नक्सलवाद के विरुद्ध मिली सफलताओं से विकास और निवेश की नई संभावनाएं मजबूत हुई हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सभी को मिलकर ऐसा छत्तीसगढ़ बनाना है, जो वर्ष 2047 तक विकसित भारत के निर्माण में अग्रणी भूमिका निभाए।

विशेषज्ञों से मिला नगरीय निकायों को मार्गदर्शन

कार्यशाला में अर्बन चैलेंज फंड और अर्बन इन्वेस्ट विंडो के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की गई। इसमें वित्तीय संसाधन जुटाने, परियोजनाओं की व्यवहार्यता, आधुनिक शहरी नियोजन, तकनीकी सहयोग और प्रभावी क्रियान्वयन जैसे विषय शामिल रहे।

हुडको और सेप्ट विश्वविद्यालय के साथ हुए समझौतों से नगरीय निकायों को परियोजना निर्माण, वित्तीय प्रबंधन, तकनीकी विशेषज्ञता, प्रशिक्षण और संस्थागत क्षमता विकास में सहयोग मिलने की उम्मीद है।

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