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धमतरी के शिक्षकों का कमाल! नवाचार से बदली सरकारी स्कूलों की तस्वीर, 23 बच्चों का नवोदय-एकलव्य में चयन

धमतरी : जब शिक्षकों ने ठाना बदलाव, तो सरकारी स्कूल बने बच्चों की पहली पसंद

नवाचार, जनभागीदारी और समर्पण की मिसाल बने धमतरी के तीन शिक्षक, राज्यपाल पुरस्कार के लिए चयनित

by bholuchand news

धमतरी, 9 सितंबर 2026।  सरकारी स्कूलों की तस्वीर बदलने के लिए हमेशा बड़े संसाधनों की जरूरत नहीं होती। जरूरत होती है नई सोच, मजबूत इच्छाशक्ति और बच्चों के भविष्य के प्रति समर्पण की। धमतरी जिले के तीन शिक्षकों ने अपने नवाचार, जनभागीदारी और निरंतर प्रयासों से शिक्षा के क्षेत्र में ऐसी मिसाल पेश की है, जिसने सरकारी स्कूलों को बच्चों और पालकों की पहली पसंद बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण बदलाव किया है। शासकीय प्राथमिक शाला धौराभाठा के शिक्षक  लीलाराम साहू, शासकीय माध्यमिक शाला लुगे की शिक्षिका  रंजीता साहू और शासकीय प्राथमिक शाला कोलियारी की शिक्षिका प्रीति शांडिल्य ने सीमित संसाधनों के बावजूद शिक्षा में कई अभिनव पहल कीं। इनके प्रयासों से विद्यार्थियों की संख्या बढ़ी, बच्चों को आधुनिक शैक्षणिक संसाधन मिले और सीखने की प्रक्रिया अधिक प्रभावी एवं रोचक बनी।

खेल-खेल में पढ़ाई से 23 बच्चों ने हासिल की नवोदय और एकलव्य में सफलता

धमतरी के शिक्षक नवाचार से सरकारी स्कूलों में बदलाव लाते हुए

शासकीय प्राथमिक शाला धौराभाठा के शिक्षक लीलाराम साहू ने पढ़ाई को बच्चों के लिए रोचक और सहज बनाने पर विशेष जोर दिया। उन्होंने खेल-खेल में शिक्षा और टीएलएम आधारित शिक्षण पद्धति को अपनाकर विद्यार्थियों में सीखने की रुचि विकसित की। उनके प्रयासों का परिणाम यह रहा कि स्कूल में विद्यार्थियों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि हुई। उनके मार्गदर्शन में पढ़ने वाले 23 विद्यार्थियों का चयन जवाहर नवोदय विद्यालय और एकलव्य विद्यालय के लिए हो चुका है। ‘पढ़ई तुहर दुआर’ और टीएलएम आधारित शिक्षण में उनके उल्लेखनीय कार्य को राज्य स्तर पर भी पहचान मिली। शिक्षा के क्षेत्र में उनके योगदान और नवाचार को देखते हुए उनका चयन  राज्यपाल पुरस्कार के लिए किया गया है।

‘मैं हूं गुल्लक’ अभियान से 150 स्कूलों तक पहुंची डिजिटल शिक्षा

शासकीय माध्यमिक शाला लुगे की शिक्षिका  रंजीता साहू ने अपने स्कूल को डिजिटल शिक्षा से जोड़ने का संकल्प लिया। संसाधनों की कमी को चुनौती मानने के बजाय उन्होंने ‘मैं हूं गुल्लक’ अभियान की शुरुआत की। शिक्षकों और पालकों की जनभागीदारी से इस पहल को आगे बढ़ाते हुए उन्होंने जिले के 150 विद्यालयों में स्मार्ट टीवी उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इसके अलावा करीब 300 विद्यालयों में गणित वर्णमाला पहुंचाने तथा लगभग 11 हजार बच्चों को पेन, कॉपी और किताबें उपलब्ध कराने में भी योगदान दिया। उनकी पहल से अनेक सरकारी विद्यालयों में विद्यार्थियों को डिजिटल माध्यम से सीखने का अवसर मिला। शिक्षा में तकनीक और जनभागीदारी के इस अभिनव समन्वय के लिए उनका चयन भी राज्यपाल पुरस्कार के लिए किया गया है।

दृष्टिबाधित बच्चों के लिए 11 हजार से अधिक ऑडियो बुक्स तैयार

शासकीय प्राथमिक शाला कोलियारी की शिक्षिका  प्रीति शांडिल्य ने समावेशी शिक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य किया है। राष्ट्रपति पुरस्कृत शिक्षिका  के. शारदा के नेतृत्व में राज्य के 30 शिक्षकों की टीम के साथ मिलकर उन्होंने दृष्टिबाधित विद्यार्थियों के लिए ब्रेल और ऑडियो आधारित शैक्षणिक सामग्री तैयार करने में योगदान दिया। इस पहल के तहत कक्षा 5वीं से 12वीं तक के दिव्यांग विद्यार्थियों के लिए 11 हजार से अधिक ऑडियो बुक्स तैयार की गईं। यह शैक्षणिक सामग्री 400 से अधिक स्कूलों और 20 दृष्टिबाधित विशेष विद्यालयों तक पहुंचाई गई। इस सामग्री को लाखों बार देखा और सुना जा चुका है। इस उल्लेखनीय कार्य का नाम ‘गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड’ में भी दर्ज हुआ है, जो धमतरी जिले के लिए गौरव की बात है।

कलेक्टर ने शाल-श्रीफल और प्रशस्ति पत्र देकर किया सम्मान

तीनों शिक्षकों की उपलब्धियों को जिले के लिए गौरवपूर्ण बताते हुए कलेक्टर अबिनाश मिश्रा ने कलेक्ट्रेट सभाकक्ष में  लीलाराम साहू और रंजीता साहू को शाल-श्रीफल एवं प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया। उन्होंने दोनों शिक्षकों को राज्यपाल पुरस्कार के लिए चयनित होने पर बधाई एवं शुभकामनाएं दीं। इस अवसर पर मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत  जयंत नाहटा सहित जिला अधिकारी उपस्थित रहे। कलेक्टर अबिनाश मिश्रा ने कहा कि धमतरी के इन शिक्षकों ने यह संदेश दिया है कि शिक्षा में बदलाव केवल संसाधनों से नहीं, बल्कि दृष्टिकोण, समर्पण और नवाचार से आता है। उन्होंने कहा कि सरकारी विद्यालयों को बच्चों और पालकों की पहली पसंद बनाने के लिए ऐसे सकारात्मक प्रयास बेहद महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने कहा कि इन शिक्षकों की उपलब्धियां जिले के लिए गर्व का विषय हैं और निश्चित रूप से अन्य शिक्षकों को भी नई पहल करने के लिए प्रेरित करेंगी। उन्होंने तीनों शिक्षकों के उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हुए शुभकामनाएं दीं।

एक शिक्षक की पहल, अनेक बच्चों के सपनों को नई उड़ान

धमतरी के इन शिक्षकों की कहानी सिर्फ पुरस्कार और सम्मान तक सीमित नहीं है। यह इस बात की मिसाल है कि जब शिक्षक अपने दायित्व को नौकरी से आगे बढ़ाकर एक मिशन बना लेते हैं, तो स्कूल की चारदीवारी से बदलाव की ऐसी रोशनी निकलती है, जो बच्चों के सपनों को नई दिशा देती है। नवोदय और एकलव्य विद्यालयों में पहुंचते बच्चे हों, डिजिटल शिक्षा से जुड़ते विद्यार्थी हों या दृष्टिबाधित बच्चों तक पहुंचती ऑडियो पुस्तकें—इन सभी प्रयासों ने सरकारी शिक्षा की संभावनाओं को नई पहचान दी है।

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