PM Office Renamed: केंद्र सरकार ने प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) के नए भवन के नाम में बड़ा बदलाव करते हुए अब इसे ‘सेवा तीर्थ’ नाम देने का निर्णय लिया है। मंगलवार को सामने आई आधिकारिक जानकारी के मुताबिक, सेंट्रल विस्टा पुनर्विकास परियोजना के तहत तैयार हो रहे इस नए परिसर का निर्माण अब अंतिम चरण में पहुंच चुका है। पहले इसे ‘एग्जीक्यूटिव एन्क्लेव’ के नाम से जाना जाता था।
तीन आधुनिक इमारतें, अलग-अलग महत्त्वपूर्ण विभागों का संचालन
नया पीएमओ भवन सेवा तीर्थ-1 के नाम से काम करेगा, जबकि उसी परिसर की अन्य दो इमारतों—सेवा तीर्थ-2 और सेवा तीर्थ-3—में क्रमशः कैबिनेट सचिवालय और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) का कार्यालय संचालित होगा। अधिकारियों ने बताया कि इन इमारतों में स्थानांतरण की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है।
जानकारी के अनुसार, ‘सेवा’ की भावना और प्रशासनिक दक्षता को केंद्र में रखते हुए इस पूरे परिसर को डिजाइन किया गया है। यह नया कॉम्प्लेक्स शासन व्यवस्था को तेज और अधिक प्रभावी बनाएगा।
उच्चस्तरीय बैठकों की शुरुआत भी हो चुकी है
अक्टूबर में कैबिनेट सेक्रेटरी टी.वी. सोमनाथन ने सेवा तीर्थ-2 में चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ और तीनों सेना प्रमुखों के साथ पहली महत्वपूर्ण बैठक भी की थी। अधिकारियों का कहना है कि यह संकेत है कि नया परिसर धीरे-धीरे पूरी क्षमता के साथ कार्य करना शुरू कर चुका है।
राजभवनों का भी बदला गया नाम—अब होंगे ‘लोक भवन/लोक निवास’
इसके साथ ही केंद्र सरकार ने विभिन्न राज्यपाल एवं उपराज्यपाल आवासों के औपनिवेशिक नामों को भी बदलने की पहल की है। सोमवार को आठ राज्यों और एक केंद्र शासित प्रदेश ने अपने राजभवन/राज निवास का नाम बदलकर ‘लोक भवन’ या ‘लोक निवास’ कर दिया है।
गृह मंत्रालय ने इस संबंध में साफ कहा कि ‘राजभवन’ शब्द उपनिवेश काल की मानसिकता को दर्शाता है, इसलिए इसका परिवर्तन आधुनिक लोकतांत्रिक मूल्यों के अनुरूप है।
सरकार की पहचान-परिवर्तन नीति जारी
इससे पहले भी कई महत्वपूर्ण सरकारी परिसरों और सड़कों के नाम बदले गए थे—
राजपथ → कर्तव्य पथ
प्रधानमंत्री आवास का नाम → लोक कल्याण मार्ग
केंद्रीय सचिवालय → कर्तव्य भवन
सरकार का कहना है कि यह बदलाव भारतीय प्रशासनिक पहचान को औपनिवेशिक छाया से बाहर लाने का प्रयास है।

