5 दिसंबर 2025 को राघव चड्ढा ने देश के गिग वर्कर्स की सुरक्षा और अधिकारों को लेकर बड़ा बयान दिया। उन्होंने 10-Minute Delivery सिस्टम (Zomato, Swiggy, Blinkit, Zepto) को लेकर कहा कि तेज़ी की इस दौड़ में सबसे ज़्यादा खतरा उन राइडर्स पर मंडराता है जो दिन-रात सड़कों पर हमारे लिए दौड़ते हैं।
राघव चड्ढा ने इन राइडर्स को भारत की “Invisible Wheels of Economy” बताया और कहा कि ये लोग हमारी सुविधा सुनिश्चित करते हैं, लेकिन खुद असुरक्षा, जोखिम और शोषण का सामना करते हैं।
उन्होंने तीन प्रमुख समस्याएँ गिनाईं—
🔸 सुरक्षा का खतरा:
डिलीवरी तय समय में पूरी करने का दबाव राइडर्स को खतरे में डाल देता है। रेड लाइट तोड़ना, तेज़ रफ्तार से गाड़ी चलाना और एक मिनट की देरी पर रेटिंग गिरने व ID ब्लॉक होने जैसी स्थितियाँ उनकी रोज़मर्रा की हकीकत हैं।
🔸 खराब कामकाजी माहौल:
12–14 घंटे तक मौसम की मार झेलकर काम करना पड़ता है, और उनके पास न सुरक्षा उपकरण हैं, न कोई स्थायी रोजगार।
🔸 आर्थिक असुरक्षा:
इन्हें गिग वर्कर कहा जाता है, इसलिए दुर्घटना, बीमारी या नौकरी छूटने की स्थिति में कोई सुरक्षा नहीं मिलती।
चड्ढा ने सवाल उठाया—“क्या ग्राहक की सुविधा, किसी इंसान की जान और गरिमा से ज्यादा कीमती है?” उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि इस तेज़-डिलीवरी मॉडल की समीक्षा की जाए और इन गिग वर्कर्स के लिए सामाजिक सुरक्षा और ठोस नीतियाँ बनाई जाएँ।

