रायपुर, 16 अक्टूबर 2026। छत्तीसगढ़ में सुशासन, पारदर्शिता और नागरिक-केंद्रित प्रशासन को मजबूत बनाने के लिए किए जा रहे नवाचारों को अब राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने की पहल की जा रही है। इसी कड़ी में नवा रायपुर स्थित भारतीय प्रबंधन संस्थान (IIM) रायपुर में पंजीयन एवं स्टाम्प विभाग के अधिकारियों-कर्मचारियों के लिए आयोजित दो दिवसीय कार्यशाला संपन्न हुई। 14 और 15 अक्टूबर को आयोजित इस कार्यशाला में विभागीय सुधारों, प्रशासनिक निर्णयों, उनके क्रियान्वयन के दौरान आई चुनौतियों और उनके समाधान को केस स्टडी के रूप में तैयार करने का प्रशिक्षण दिया गया।
कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य छत्तीसगढ़ में हुए प्रशासनिक सुधारों के अनुभवों को व्यवस्थित रूप से दस्तावेजीकृत करना और उन्हें राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय अकादमिक जर्नलों में प्रकाशित कराने की दिशा में काम करना है। इससे प्रदेश में अपनाई गई सफल कार्यप्रणालियों और नवाचारों को देश-दुनिया के शिक्षाविदों, शोधार्थियों, विद्यार्थियों, प्रशासकों और नीति-निर्माताओं तक पहुंचाने में मदद मिलेगी।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में प्रशासनिक सुधारों को बढ़ावा
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व और वित्त एवं पंजीयन मंत्री ओ.पी. चौधरी के मार्गदर्शन में छत्तीसगढ़ पंजीयन विभाग द्वारा पिछले तीन वर्षों में विभिन्न प्रशासनिक सुधार और जनहितकारी पहल की गई हैं। महानिरीक्षक पंजीयन एवं अधीक्षक मुद्रांक पुष्पेंद्र मीणा के नेतृत्व में विभाग पंजीयन सेवाओं को अधिक सरल, पारदर्शी, तकनीक आधारित और नागरिकों के लिए सुविधाजनक बनाने की दिशा में काम कर रहा है।
विभागीय स्तर पर किए गए इन सुधारों के दौरान अधिकारियों को कई व्यावहारिक चुनौतियों का सामना करना पड़ा। स्थानीय परिस्थितियों, प्रशासनिक अनुभवों और नवाचारों के माध्यम से इन चुनौतियों का समाधान तलाशा गया। अब इन्हीं अनुभवों को केस स्टडी के रूप में तैयार करने की पहल की जा रही है, ताकि उनसे मिली सीख का उपयोग भविष्य में प्रशासनिक प्रशिक्षण, शोध और नीति निर्माण में किया जा सके।
केस स्टडी से देश-दुनिया तक पहुंचेंगे छत्तीसगढ़ के अनुभव
कार्यशाला का एक प्रमुख उद्देश्य प्रशासनिक उपलब्धियों को केवल विभागीय रिकॉर्ड तक सीमित न रखकर उन्हें अध्ययन और शोध के उपयोगी उदाहरणों के रूप में विकसित करना था। केस स्टडी के माध्यम से यह समझने में मदद मिलेगी कि किसी प्रशासनिक समस्या की पहचान कैसे की गई, निर्णय लेने के दौरान किन परिस्थितियों पर विचार किया गया और सुधार लागू करते समय आने वाली चुनौतियों का समाधान किस तरह निकाला गया।
इन अनुभवों को अकादमिक रूप में प्रस्तुत किए जाने से अन्य राज्यों और संस्थानों को भी उपयोगी जानकारी मिल सकती है। इससे छत्तीसगढ़ में अपनाए गए प्रशासनिक नवाचारों को व्यापक मंच मिलेगा और सफल कार्यप्रणालियों को दूसरे विभागों में अपनाने की संभावनाएं भी बढ़ेंगी।
दो दिनों तक केस स्टडी लेखन और शोध की बारीकियों पर प्रशिक्षण
कार्यशाला के पहले दिन केस स्टडी लेखन की आवश्यकता, उसकी संरचना, विषय चयन और प्रशासनिक समस्याओं को प्रभावी तरीके से प्रस्तुत करने की तकनीकों पर चर्चा की गई। विशेषज्ञों ने प्रतिभागियों को बताया कि विभाग में लिए गए महत्वपूर्ण निर्णयों, उनके पीछे की परिस्थितियों, क्रियान्वयन के दौरान आई कठिनाइयों और अपनाए गए समाधानों को किस तरह एक व्यवस्थित केस स्टडी में बदला जा सकता है।
दूसरे दिन केस स्टडी तैयार करने की व्यावहारिक प्रक्रिया पर विशेष जोर दिया गया। इसमें आवश्यक सूचनाओं का संकलन, तथ्यों का सत्यापन, संबंधित व्यक्तियों के साक्षात्कार, केस की रूपरेखा तैयार करना और विश्लेषणात्मक लेखन जैसे विषय शामिल रहे।
इसके साथ ही प्रतिभागियों को टीचिंग नोट तैयार करने, उपयुक्त अकादमिक जर्नल और प्रकाशन मंच का चयन करने तथा समीक्षा और प्रकाशन की प्रक्रिया के बारे में भी जानकारी दी गई। इसका उद्देश्य अधिकारियों को अपने प्रशासनिक अनुभवों को शोधपरक, तथ्यात्मक और अकादमिक मानकों के अनुरूप प्रस्तुत करने में सक्षम बनाना था।
IIM रायपुर के विशेषज्ञों ने किया मार्गदर्शन
कार्यशाला में पंजीयन विभाग के डीआईजी मदन लाल कोर्पे और डीआईजी उषा साहू सहित विभागीय अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने भाग लिया। IIM रायपुर के डायरेक्टर-इन-चार्ज प्रो. संजीव पाराशर, कार्यक्रम निदेशक प्रो. प्रणित कुमार रॉय, प्रो. सत्यसिबा दास, प्रो. मनोजीत चट्टोपाध्याय, प्रो. अर्चना पाराशर और प्रो. आर.के. जना सहित अन्य विशेषज्ञों ने प्रशिक्षण सत्रों में प्रतिभागियों का मार्गदर्शन किया।
विशेषज्ञों ने बताया कि एक प्रभावी केस स्टडी केवल समस्या और उसके समाधान का विवरण नहीं होती, बल्कि उसमें निर्णय लेने की प्रक्रिया, उपलब्ध विकल्पों, अपनाई गई रणनीतियों और उनसे प्राप्त सीख का विश्लेषण भी शामिल होता है। इस तरह तैयार की गई केस स्टडी प्रशासनिक अनुभवों को दूसरों तक पहुंचाने और भविष्य में बेहतर निर्णय लेने के लिए उपयोगी साबित हो सकती है।
दस्तावेजीकरण से प्रशासनिक प्रशिक्षण और नीति निर्माण को मिलेगा लाभ
पंजीयन विभाग की यह पहल प्रशासनिक सुधारों को संस्थागत ज्ञान में बदलने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। विभागीय अनुभवों पर आधारित केस स्टडी तैयार होने से भविष्य में अधिकारियों के प्रशिक्षण, नीति निर्माण और प्रशासनिक प्रक्रियाओं में सुधार के लिए संदर्भ सामग्री उपलब्ध हो सकेगी।
इसके माध्यम से विभाग में किए गए नवाचारों का विश्लेषण करना, उनकी उपयोगिता को समझना और उनसे प्राप्त सीख को अन्य प्रशासनिक इकाइयों तक पहुंचाना आसान होगा। साथ ही, राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय अकादमिक मंचों पर इन अनुभवों के प्रकाशन से छत्तीसगढ़ में किए जा रहे प्रशासनिक सुधारों को व्यापक पहचान मिलने की संभावना है।
प्रमाणपत्र वितरण के साथ कार्यशाला का समापन
कार्यशाला के समापन अवसर पर पंजीयन विभाग के डीआईजी मदन लाल कोर्पे, IIM रायपुर के डायरेक्टर-इन-चार्ज प्रो. संजीव पाराशर और कार्यक्रम निदेशक प्रो. प्रणित कुमार रॉय ने प्रतिभागियों को प्रमाणपत्र प्रदान किए।
यह कार्यशाला पंजीयन एवं स्टाम्प विभाग और IIM रायपुर के बीच ज्ञान तथा अनुभवों के आदान-प्रदान की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल रही। इसके जरिए विभागीय सुधारों को व्यवस्थित रूप से दर्ज करने, उनसे मिली सीख को साझा करने और छत्तीसगढ़ की प्रशासनिक कार्यप्रणाली को राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्रीय अकादमिक जगत तक पहुंचाने का रास्ता तैयार किया जा रहा है।
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