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ITSA Hospital में हाई-रिस्क मरीज का सफल इलाज, माइक्रा AV2 लीडलेस पेसमेकर से बची जान

by Desk 1

रायपुर: छत्तीसगढ़ में हृदय रोग उपचार के क्षेत्र में एक उल्लेखनीय उपलब्धि दर्ज की गई है। ITSA Hospital ने 75 वर्षीय एक उच्च जोखिम वाली महिला मरीज में अत्याधुनिक मेडट्रॉनिक माइक्रा AV2 सिंक्रोनस लीडलेस पेसमेकर का सफल प्रत्यारोपण कर चिकित्सा क्षेत्र में नई मिसाल कायम की है।

मरीज अस्पताल में चक्कर आने और सांस फूलने की शिकायत लेकर पहुंची थीं। जांच के दौरान उन्हें कम्प्लीट हार्ट ब्लॉक होने की पुष्टि हुई, जो एक गंभीर और जानलेवा हृदय समस्या मानी जाती है।

समय पर लिया गया सही चिकित्सकीय निर्णय

मरीज ने प्रारंभ में ITSA Hospital के डायरेक्टर एवं एमडी (इंटरनल मेडिसिन) डॉ. राजकुमार बरनवाल से परामर्श लिया। उन्होंने मरीज की स्थिति की गंभीरता को तुरंत समझते हुए उन्हें इंटरवेंशनल कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. अक्षत जैन के पास रेफर किया।

यह जटिल और दुर्लभ प्रक्रिया डॉ. अक्षत जैन के नेतृत्व में सफलतापूर्वक संपन्न की गई, जो मिनिमली इनवेसिव हृदय उपचार में अपनी विशेषज्ञता के लिए जाने जाते हैं।

कई गंभीर बीमारियों से पीड़ित थीं मरीज

75 वर्षीय यह महिला मरीज पहले से ही उच्च रक्तचाप, मधुमेह, अत्यधिक मोटापा, वायरल न्यूमोनाइटिस और यूरिनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन जैसी कई गंभीर बीमारियों से जूझ रही थीं। जांच के दौरान उनमें बाइफैसिकुलर ब्लॉक के साथ इंटरमिटेंट कम्प्लीट हार्ट ब्लॉक पाया गया, जो अचानक दिल की धड़कन बेहद धीमी होने या रुक जाने का कारण बन सकता है।

पारंपरिक पेसमेकर था अत्यधिक जोखिमपूर्ण

मरीज की समग्र स्वास्थ्य स्थिति को देखते हुए पारंपरिक पेसमेकर लगाना उनके लिए अत्यंत जोखिमपूर्ण माना गया। सामान्य पेसमेकर में दिल के अंदर तार (लीड) डाले जाते हैं और छाती के नीचे सर्जिकल पॉकेट बनाई जाती है, जिससे संक्रमण और अन्य जटिलताओं की संभावना बढ़ जाती है।

माइक्रा AV2 लीडलेस पेसमेकर क्यों बना बेहतर विकल्प

इन सभी जोखिमों को ध्यान में रखते हुए ITSA Hospital की कार्डियोलॉजी टीम ने मेडट्रॉनिक माइक्रा AV2 लीडलेस पेसमेकर का चयन किया। यह तकनीक दुनिया की सबसे उन्नत पेसिंग तकनीकों में से एक है और भारत में अभी भी सीमित केंद्रों पर ही उपलब्ध है।

यह डिवाइस पैर की नस के माध्यम से सीधे हृदय में प्रत्यारोपित की जाती है, जिससे छाती पर किसी भी प्रकार की ओपन सर्जरी की आवश्यकता नहीं पड़ती।

लीडलेस पेसमेकर के प्रमुख फायदे

सर्जिकल पॉकेट नहीं, संक्रमण का खतरा न्यूनतम

तार (लीड) नहीं होने से टूटने या खिसकने की समस्या नहीं

आकार में बेहद छोटा, लगभग एक विटामिन कैप्सूल के बराबर

मिनिमली इनवेसिव प्रक्रिया, तेज रिकवरी

अधिकतर मामलों में अगले ही दिन अस्पताल से छुट्टी

बैटरी लाइफ 15 साल से अधिक

छाती पर कोई निशान या उभार नहीं

हाई-रिस्क मरीज के लिए जीवनरक्षक साबित हुआ इलाज

मरीज में सक्रिय संक्रमण, मधुमेह और मोटापे के कारण सामान्य सर्जरी से घाव भरने में देरी और संक्रमण का खतरा था। फेफड़ों की बीमारी के कारण लंबी प्रक्रिया भी सुरक्षित नहीं थी। ऐसे में लीडलेस पेसमेकर इस मरीज के लिए सबसे सुरक्षित और प्रभावी समाधान साबित हुआ।

Central India में उन्नत हृदय उपचार की नई पहचान

यह केस इस बात का स्पष्ट उदाहरण है कि आधुनिक तकनीक और अनुभवी चिकित्सकीय निर्णय मिलकर जटिल से जटिल मामलों में भी जीवन बचा सकते हैं।
डॉ. अक्षत जैन की सटीक योजना और तकनीकी दक्षता के कारण मरीज को बेहतर और सुरक्षित परिणाम प्राप्त हुआ।

इस उपलब्धि के साथ ITSA Hospital ने सेंट्रल इंडिया में उन्नत कार्डियोलॉजी उपचार के क्षेत्र में एक नया मानक स्थापित किया है, जिससे विश्वस्तरीय इलाज अब मरीजों के और भी करीब पहुंच रहा है।

 

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