रायपुर। छत्तीसगढ़ स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में तेजी से नई पहचान बना रहा है। आधुनिक चिकित्सा तकनीकों, अत्याधुनिक अस्पतालों और विशेषज्ञ डॉक्टरों की उपलब्धता के साथ राजधानी रायपुर मध्य भारत के एक प्रमुख मेडिकल हब के रूप में उभर रहा है। अब प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार राजधानी तक सीमित नहीं रहेगा। कैंसर मरीजों को बेहतर उपचार उपलब्ध कराने के उद्देश्य से संजीवनी ग्रुप ऑफ हॉस्पिटल्स द्वारा बिलासपुर, रायगढ़, जगदलपुर (बस्तर) और अंबिकापुर (सरगुजा) में अत्याधुनिक कैंसर केयर यूनिट्स स्थापित करने की तैयारी की जा रही है।
संजीवनी ग्रुप के निदेशक एवं वरिष्ठ कैंसर विशेषज्ञ डॉ. यूसुफ मेमन के अनुसार, आगामी 6 से 12 महीनों के भीतर इन चारों शहरों में कैंसर उपचार की आधुनिक सुविधाएं विकसित की जाएंगी। यहां नवीनतम पीढ़ी की एडवांस्ड रेडियोथेरेपी मशीनों और आधुनिक कीमोथेरेपी केंद्रों की सुविधा उपलब्ध कराने की योजना है। इससे दूरस्थ क्षेत्रों के मरीजों को कैंसर के इलाज के लिए बार-बार रायपुर या दूसरे राज्यों के बड़े शहरों का रुख नहीं करना पड़ेगा।
रायपुर बना मध्य भारत का प्रमुख मेडिकल हब
डॉ. यूसुफ मेमन ने बताया कि एक दशक पहले तक छत्तीसगढ़ में गंभीर बीमारियों और जटिल सर्जरी के लिए मरीजों को दिल्ली, मुंबई, चेन्नई और हैदराबाद जैसे शहरों में जाना पड़ता था। इससे मरीजों और उनके परिजनों को आर्थिक एवं मानसिक परेशानियों का सामना करना पड़ता था। कई आपातकालीन मामलों में उपचार तक पहुंचने में लगने वाला समय भी चुनौती बन जाता था।
अब रायपुर में आधुनिक चिकित्सा तकनीकों और विशेषज्ञ सेवाओं के विस्तार से प्रदेश के मरीजों को अपने ही राज्य में उन्नत उपचार की सुविधा मिल रही है। अस्पताल समूह के अनुसार, पड़ोसी राज्यों से भी मरीज इलाज के लिए रायपुर पहुंच रहे हैं।
कैंसर उपचार में आधुनिक तकनीक से बढ़ी सटीकता
कैंसर के उपचार के क्षेत्र में आधुनिक रेडिएशन तकनीक का उपयोग मरीजों के लिए महत्वपूर्ण बदलाव लेकर आया है। संजीवनी ग्रुप द्वारा एसजीआरटी (SGRT), आइडेंटिफाई और मोशन मैनेजमेंट तकनीक उपलब्ध कराई गई है। अस्पताल के अनुसार, यह सेंट्रल इंडिया में अपनी तरह की पहली तकनीक है।
इस प्रणाली में मरीज की त्वचा की 3D सब-मिलीमीटर रियल-टाइम मैपिंग की जाती है। इससे पारंपरिक टैटू या दर्दनाक मार्किंग की आवश्यकता के बिना रेडिएशन उपचार को अधिक सटीक बनाने में मदद मिलती है। मरीज के सांस लेने, खांसने या शरीर में हलचल होने पर सिस्टम रेडिएशन बीम को रोक सकता है, जिससे आसपास के स्वस्थ अंगों और ऊतकों पर अनावश्यक रेडिएशन का प्रभाव कम करने में सहायता मिलती है।
इसके अलावा अस्पताल में वाइटल ऑर्गन प्रोटेक्शन और एडवांस्ड कोबाल्ट ब्रेकीथेरेपी जैसी सुविधाएं भी शुरू की गई हैं। ब्रेकीथेरेपी में ट्यूमर के नजदीक विकिरण स्रोत पहुंचाकर उपचार किया जाता है। इससे सर्वाइकल, प्रोस्टेट, एंडोमेट्रियल और हेड-एंड-नेक कैंसर के उपचार में अधिक सटीकता लाने का प्रयास किया जा रहा है।
रोबोटिक सर्जरी से जटिल ऑपरेशन में मिल रही मदद
अस्पताल में थर्ड जनरेशन मेक इन इंडिया रोबोटिक सर्जरी तकनीक के माध्यम से भी जटिल ऑपरेशन किए जा रहे हैं। इसमें 3D हाई-डेफिनिशन विजन और 360 डिग्री घूमने वाले माइक्रो-इंस्ट्रूमेंट्स का उपयोग किया जाता है।
इस तकनीक से शरीर के संकरे और जटिल हिस्सों में भी सटीक सर्जरी करने में सहायता मिलती है। अस्पताल के अनुसार, चयनित मरीजों को ऑपरेशन के बाद 24 से 48 घंटे के भीतर डिस्चार्ज किया जा सकता है। हालांकि, अस्पताल में रहने की अवधि मरीज की बीमारी और स्वास्थ्य स्थिति पर निर्भर करती है।
हृदय रोग और जांच के लिए भी अत्याधुनिक सुविधाएं
कैंसर उपचार के साथ-साथ कार्डियोलॉजी और डायग्नोस्टिक इमेजिंग के क्षेत्र में भी आधुनिक सुविधाओं का विस्तार किया गया है। इनबिल्ट सीटी कैथ लैब की सुविधा से आपातकालीन हृदय रोगियों की जांच और उपचार की प्रक्रिया को तेज करने में मदद मिलती है। इससे मरीज को अलग-अलग कमरों में शिफ्ट करने की आवश्यकता कम हो सकती है।
इसके अलावा अत्याधुनिक हार्ट-लंग बाईपास मशीन के माध्यम से जटिल ओपन हार्ट सर्जरी और जन्मजात हृदय संबंधी विकारों के उपचार की सुविधा उपलब्ध है।
डायग्नोस्टिक सेवाओं में 82 सेंटीमीटर वाइड बोर वाली 192-स्लाइस सीटी स्कैन मशीन और सीमेंस 24-चैनल एआई आधारित वन फ्लो प्लस एमआरआई जैसी आधुनिक तकनीकों का उपयोग किया जा रहा है। इन सुविधाओं से जांच को अधिक तेज और मरीजों के लिए सुविधाजनक बनाने में मदद मिलती है।
किडनी ट्रांसप्लांट और बिना बड़े चीरे वाली प्रक्रियाएं
नेफ्रोलॉजी और ऑर्गन ट्रांसप्लांट के क्षेत्र में भी उन्नत हीमोडायलिसिस मशीनों तथा विशेष ट्रांसप्लांट आईसीयू की सुविधा उपलब्ध कराई गई है। अस्पताल के अनुसार, यहां जीवित डोनर और कैडेवरिक डोनर से किडनी प्रत्यारोपण की प्रक्रियाएं की जा रही हैं।
इसके साथ ही इमेज-गाइडेड इंटरवेंशनल रेडियोलॉजी के माध्यम से बिना बड़े चीरे के ट्यूमर एब्लेशन और वैस्कुलर स्टेंटिंग जैसी प्रक्रियाएं भी की जा रही हैं। इन तकनीकों का उद्देश्य मरीजों को कम चीर-फाड़ वाली आधुनिक उपचार सुविधाएं उपलब्ध कराना है।
बस्तर और सरगुजा के मरीजों को मिलेगी बड़ी राहत
संजीवनी ग्रुप की प्रस्तावित कैंसर केयर यूनिट्स का सबसे बड़ा लाभ प्रदेश के दूरस्थ और आदिवासी बहुल क्षेत्रों के मरीजों को मिलने की उम्मीद है।
वर्तमान में बस्तर और सरगुजा संभाग के कई मरीजों को रेडिएशन और कीमोथेरेपी के लिए रायपुर के अलावा विशाखापट्टनम और नागपुर जैसे शहरों तक जाना पड़ता है। इससे यात्रा, रहने और उपचार पर अतिरिक्त खर्च उठाना पड़ता है।
बिलासपुर, रायगढ़, जगदलपुर और अंबिकापुर में कैंसर उपचार की आधुनिक सुविधाएं विकसित होने से मरीजों को अपने क्षेत्र के नजदीक ही इलाज मिल सकेगा। इससे समय और यात्रा खर्च में कमी आने के साथ मरीजों और उनके परिजनों को भी राहत मिलने की संभावना है।
कैंसर और हृदय रोग के अलावा कई विशेषज्ञ सेवाएं उपलब्ध
संजीवनी रायपुर में कैंसर और हृदय रोगों के अतिरिक्त कई अन्य चिकित्सा क्षेत्रों में भी उपचार की सुविधाएं उपलब्ध हैं। इनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं:
- न्यूरोसर्जरी
- नेफ्रोलॉजी
- यूरोलॉजी
- गैस्ट्रोएंट्रोलॉजी
- एडवांस्ड ऑर्थोपेडिक्स
- पल्मोनोलॉजी
- क्रिटिकल केयर
- 24×7 ट्रॉमा एवं इमरजेंसी सेवाएं
दूरस्थ क्षेत्रों से मरीजों को अस्पताल तक पहुंचाने के लिए सुसज्जित एम्बुलेंस और एयर एम्बुलेंस नेटवर्क की सुविधा भी उपलब्ध कराई जा रही है।
मेडिकल टूरिज्म के नक्शे पर मजबूत हो रहा छत्तीसगढ़
आधुनिक चिकित्सा तकनीकों, विशेषज्ञ डॉक्टरों और अस्पतालों में बढ़ते निवेश से छत्तीसगढ़ स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में नई संभावनाएं तलाश रहा है। रायपुर में विकसित हो रही चिकित्सा सुविधाओं के साथ अब संभागीय मुख्यालयों तक कैंसर उपचार का विस्तार करने की पहल प्रदेश के स्वास्थ्य ढांचे को मजबूत कर सकती है।
यदि प्रस्तावित चारों कैंसर केयर यूनिट्स निर्धारित समयसीमा में शुरू होती हैं, तो बस्तर से सरगुजा तक कैंसर मरीजों को अपने क्षेत्र के करीब आधुनिक उपचार उपलब्ध कराने की दिशा में यह एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगा। इससे छत्तीसगढ़ की मध्य भारत में मेडिकल टूरिज्म हब के रूप में पहचान को भी मजबूती मिल सकती है।
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