रायपुर, 24 अगस्त 2026। कला और संगीत की संस्कारधानी रायगढ़ में 14 से 23 सितंबर 2026 तक रामलीला मैदान में विश्वप्रसिद्ध चक्रधर समारोह 2026 का भव्य आयोजन किया जाएगा। दस दिनों तक चलने वाले इस सांस्कृतिक महाकुंभ में छत्तीसगढ़ की लोक एवं शास्त्रीय कला के साथ देशभर की विविध सांस्कृतिक विधाओं का संगम देखने को मिलेगा।
समारोह में कुल 42 प्रस्तुतियां प्रस्तावित हैं, जिनमें 24 प्रस्तुतियां रायगढ़ और छत्तीसगढ़ के कलाकारों की होंगी। इससे प्रदेश की स्थानीय प्रतिभाओं को राष्ट्रीय स्तर के मंच पर अपनी कला और संस्कृति को प्रस्तुत करने का अवसर मिलेगा।
पद्मश्री कलाकारों की प्रस्तुतियां रहेंगी खास आकर्षण
चक्रधर समारोह 2026 में देश और प्रदेश के प्रतिष्ठित पद्मश्री सम्मान से अलंकृत कलाकारों की प्रस्तुतियां विशेष आकर्षण का केंद्र रहेंगी।
रायगढ़ कथक घराने की गौरवशाली परंपरा के ध्वजवाहक पद्मश्री रामलाल बरेठ के निर्देशन में कथक की विशेष प्रस्तुति होगी। वहीं पंडवानी को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने वाली पद्मश्री डॉ. उषा बारले अपनी प्रस्तुति देंगी।
इसके अलावा सूफी एवं कबीर गायन के चर्चित कलाकार पद्मश्री भारती बंधु तथा छत्तीसगढ़ी लोक कला और संस्कृति के लोकप्रिय कलाकार पद्मश्री अनुज शर्मा भी समारोह में अपनी कला प्रस्तुत करेंगे।
विशेष काव्य संध्या में पद्मश्री सुरेंद्र शर्मा सहित देश के वरिष्ठ कवि अपनी रचनाओं से दर्शकों और श्रोताओं को भाव-विभोर करेंगे। राष्ट्रीय स्तर के इन कलाकारों की मौजूदगी समारोह को विशेष पहचान देगी।
रायगढ़ के कलाकारों की सात प्रस्तुतियां
चक्रधर समारोह में रायगढ़ की स्थानीय प्रतिभाओं और सांस्कृतिक विरासत को विशेष स्थान दिया गया है। आयोजन की शुरुआत वेदमणि महाराज के शिष्यों द्वारा पारंपरिक गणेश वंदना से होगी।
इसके बाद रायगढ़ की कथक परंपरा को आगे बढ़ाने वाले कलाकार अपनी प्रस्तुतियां देंगे। पद्मश्री रामलाल बरेठ के मार्गदर्शन में भूपेंद्र बरेठ एवं समूह, विभूति शर्मा, वासंती वैष्णव एवं समूह तथा नृत्यांजलि द्वारा कथक की प्रस्तुतियां दी जाएंगी।
वहीं राकेश शर्मा सूफी गायन प्रस्तुत करेंगे, जबकि सोनू गुप्ता एवं ग्रुप (लोक कला मंच) छत्तीसगढ़ी लोक संगीत की प्रस्तुति देंगे।
इन प्रस्तुतियों के माध्यम से रायगढ़ की कथक परंपरा, लोक संगीत और सूफी गायन की विविधता एक ही मंच पर देखने को मिलेगी।
बस्तर से सरगुजा तक दिखेगी छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति
चक्रधर समारोह में प्रदेश के विभिन्न अंचलों की कला और संस्कृति को भी व्यापक प्रतिनिधित्व दिया गया है।
बस्तर अकैडमी ऑफ डांस, आर्ट्स एंड लिटरेचर (बादल) के कलाकार बस्तर की लोक धरोहर और आदिवासी संस्कृति की जीवंत झलक प्रस्तुत करेंगे। वहीं भूपेंद्र साहू (गरियाबंद) छत्तीसगढ़ी लोक नृत्य की प्रस्तुति देंगे।
तरुणा साहू (रायपुर) पंडवानी प्रस्तुत करेंगी। पायल साहू (दुर्ग), अनुराग शर्मा (रायपुर) और लहरगंगा पुनरिक साहू (बालोद) लोक संगीत की प्रस्तुतियों के माध्यम से छत्तीसगढ़ी माटी की आवाज को मंच तक पहुंचाएंगे।
इसके अलावा इंडियन आइडल फेम अमित साना (भिलाई) का सुगम गायन भी समारोह का विशेष आकर्षण रहेगा।
इंदिरा कला संगीत विश्वविद्यालय, खैरागढ़ के विद्यार्थी सामूहिक नृत्य प्रस्तुत करेंगे। प्रो. डॉ. लवली शर्मा सितार वादन करेंगी।
वहीं दीक्षा रथ (सारंगढ़) ओडिसी, श्वेता नायक (बिलासपुर) कुचिपुड़ी तथा अनुष्का सुल्तानिया (रायपुर) और शिव शक्ति कला संस्थान (बिलासपुर) द्वारा कथक की प्रस्तुतियां दी जाएंगी।
देशभर की शास्त्रीय और लोक कलाओं का संगम
चक्रधर समारोह में छत्तीसगढ़ के साथ देश के विभिन्न राज्यों की कला परंपराओं को भी मंच मिलेगा।
केरल के गुरु कोट्क्कल नंदकुमारन नायर कथकली प्रस्तुत करेंगे, जबकि मणिपुर की डॉ. मंजू इलंगबम मणिपुरी नृत्य की प्रस्तुति देंगी।
दिल्ली की टी. लक्ष्मी रेड्डी कुचिपुड़ी तथा चेन्नई की श्रीविद्या शैलेश और बेंगलुरु की शिवरंजनी हरीश भरतनाट्यम प्रस्तुत करेंगी।
ओडिशा और दिल्ली से जान्हवी बेहरा, रीला होता एवं श्री गौरी शंकर दाश ओडिसी नृत्य प्रस्तुत करेंगे। भुवनेश्वर के बी. साहू गोटीपुआ कला की प्रस्तुति देंगे।
वहीं कोलकाता, दिल्ली और बनारस से आने वाले मौमाला नायक, सुब्रता पंडित एवं रुद्रशंकर मिश्रा कथक प्रस्तुत करेंगे।
लोक संगीत और वादन भी रहेगा आकर्षण
समारोह में लोक संगीत और वाद्य संगीत की विविध प्रस्तुतियां भी दर्शकों को देखने-सुनने को मिलेंगी।
राजस्थान के बाड़मेर की स्टार्क सोसाइटी राजस्थानी लोक संगीत प्रस्तुत करेगी। संस्कार कला संघ, जबलपुर नृत्य नाटिका पेश करेगा।
दिल्ली के निशित गंगानी तबला वादन करेंगे। वहीं वृंदावन का माधवरस बैंड और बनारस का त्रिवेणी संगम संतूर, पखावज और तबले के दुर्लभ संगम से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध करेगा।
संस्कृति और परंपरा के संरक्षण का बनेगा राष्ट्रीय मंच
चक्रधर समारोह 2026 स्थानीय कलाकारों से लेकर राष्ट्रीय स्तर के स्थापित कलाकारों तक को एक मंच पर लाने वाला महत्वपूर्ण सांस्कृतिक आयोजन होगा। समारोह में रायगढ़ घराने की कथक परंपरा, छत्तीसगढ़ी लोक संगीत, पंडवानी, बस्तर की लोक धरोहर और प्रदेश की नई पीढ़ी के कलाकारों के साथ देश के विभिन्न हिस्सों की शास्त्रीय नृत्य एवं संगीत परंपराएं दिखाई देंगी।
दस दिनों तक चलने वाला यह आयोजन छत्तीसगढ़ की समृद्ध कला और सांस्कृतिक विरासत को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने के साथ कलाकारों को अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने का अवसर भी प्रदान करेगा।
आयोजन समिति ने देश-विदेश के कला प्रेमियों, कलाकारों, शोधार्थियों, संस्कृति अध्येताओं और आम नागरिकों से इस सांस्कृतिक महापर्व चक्रधर समारोह 2026 में सहभागी बनने का आह्वान किया है।
ये भी पढ़े......मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने किया ‘जशपुर : एक परिचय’ पुस्तक का विमोचन
और अधिक जानकारी के लिए पढ़ते रहें भोलूचंद.कॉम
